Saturday, October 24, 2009

रैंप पर कैटवॉक करती भैंस...

क्या आपने कभी रैंप पर भैंस को कैटवॉक करते देखा है? शायद नहीं, लेकिन बिहार के मधेपुरा जिले में गुरुवार को कई लोगों ने रैंप पर मॉडल बनीं भैंस को कदम से कदम मिलाकर चलते देखा। अभी तक मुझे भी इसकी जानकारी नहीं थी लेकिन हमारे एक सहयोगी ने जब पटना से मेल किया तो जाकर विश्वास हुआ कि भैंस भी कैटवॉक कर सकती हैं।


मधेपुरा जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर साहुगढ़ गांव में गुरुवार को भैंसों के लिए विशेष रूप से एक फैशन शो का आयोजन किया गया था। शो में मॉडल बनी भैंसों ने रैंप पर सजधर कर अपने 'सौंदर्य' की नुमाइश की। कार्यक्रम के अंत में भैंसों को पुरस्कार भी दिया गया।


इस फैशन शो के आयोजनकर्ता प्रभात रंजन ने कहा , "शो में जया, माधुरी, राधा, शिल्पा सहित एक दर्जन भैंसों ने भाग लिया। इन भैंसों को शो में भाग लेने के पहले स्नान करवाया गया था और उन्हें लाल और पीले रंग के आकर्षक कपड़े भी पहनाए गए थे।"


रंजन ने बताया कि कोसी के इलाके में पशुपालकों को प्रोत्साहित करने के लिए इस तरह के फैशन शो का आयोजन लगातार किया जाएगा। उन्होंने बताया, "राधा नाम की भैंस के आकर्षक पहनावे और उसकी शालीनता को देखते हुए उसे विजेता घोषित किया गया और प्रथम पुरस्कार के रूप में 501 रुपये का इनाम भी दिया गया। वहीं दूसरे स्थान पर रहने वाली प्रतियोगी को 301 रुपये तथा तृतीय स्थान पर रहने वाली प्रतियोगी को 101 रुपये का पुरस्कार दिया गया।"


पुरस्कार की राशि प्रतिभागी भैंसों के पालकों को दी गई। इस कार्यक्रम को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष कोसी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद इन क्षेत्रों के पशुपालकों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था, जिसके बाद अधिकांश लोगों ने यहां पशुपालन करना ही छोड़ दिया।

(यह जानकारी मिली- आईएएनएस के पटना संवाददाता मनोज पाठक से)

9 comments:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

कैटवाक और प्रतियोगिता पसंद आई। इस के चलते बेचारी भैंसों को भी कुछ तो स्थान मिलेगा। पर पुरस्कार राशि बहुत कम है। इतना तो सजावट पर ही खर्च हो गया होगा।

आमीन said...

अच्छा प्रयास है... पशुपालकों को प्रोत्साहित करने के लिए

http://dunalee.blogspot.com/

परमजीत बाली said...

सही है ऐसे प्रयास होने चाहिए....
वैसे लगता है यह फोटो भैसं से पूछे बिना खीचा गया है......भैस जरा गुस्से मे लग रही है:))

संगीता पुरी said...

अच्‍छी प्रतियोगिता .. हमारे यहां दीपावली के बाद की द्वितीया को गाय बैलों को सजाकर उनकी पूजा की जाती है !!

M VERMA said...

सामने खडी भैंस के सींग के डिजाईनर का नाम और पता कृपया मेरे ईमेल पर भेज दें. मेरे पास भी एक भैंस है उसके लिये डिजाईन करवानी है.

ललित शर्मा said...

आपने बहुत बढिया जानकारी दी, अगर इस शो की फ़ोटो उपलब्ध हो सके तो अवश्य भेजें? ऐसे आयोजन ग्रामीण क्षेत्र में होने चाहिए जिससे ग्रामीणों का स्वथ्य मनोरंजन होता है और पशुपालन को प्रोत्साहन भी मिलता है,उत्तम जानकारी के लिये आपको बधाई,

शरद कोकास said...

हमारे यहाँ तो सडको पर

राकेश said...

जबरदस्‍त. छा गए.

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

अपने यहाँ लोगों को कुछ सार्थक करने की अपेक्षा इस प्रकार की नौटंकियाँ करनी ज्यादा भाती हैं ।