Friday, May 29, 2009

नीतीश बाबू थोड़ा दरभंगा के सड़कों पर भी ध्यान दीजिए...

कहीं की भी यात्रा आपको कुछ सबक जरूर सीखाती है। कल ही बिहार के बड़े और समृद्ध शहरों में एक दरभंगा में पांच दिन ठहरने के बाद लौटा हूं। वहां से सबक यह लेकर आया हूं कि दूर के ढोल के आवाज में आकर किसी की तारीफों के पुल को लंबे समय तक मत थामे रहिए।

बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने चकाचक सड़क और भय मुक्त बिहार के नाम पर लोकसभा चुनाव में सफलता हासिल की लेकिन कुछ इलाकों में चकाचक सड़क की व्याख्या दुरुस्त नहीं है और दरभंगा इसी कड़ी का हिस्सा है।

शहर दरभंगा के तकरीबन सभी इलाकों का चक्कर लगाया लेकिन कोई भी सड़क ऐसी नहीं मिली जहां सुकून मिले, हर जगह का हाल बेहाल। आठ साल के अंतराल के बाद दरभंगा पहुंचने पर कोई खास अंतर देखने को नहीं मिला।

भले ही नीतीश लहर में राजद नेता फातमी को कीर्ति आजाद ने पराजित कर दिया लेकिन विकास के नाम पर इस समृद्ध शहर की हालत पस्त ही है।

वैसे बड़े-बड़े स्कूलों का व्यवसाय यहां तेजी से फैल रहा है लेकिन सड़क-बिजली का प्रभाव सिकुड़ता ही जा रहा है। बड़े-बड़े पोखरों (तालाब) का शहर दरभंगा गंदगी के अंबार को खुद में समेटता जा रहा है.। वैसे विश्वविद्यालय परिसर का हाल बुरा नहीं है। वहां की सड़के जरूर नीतीश कुमार की घोषणाओं पर अमल कर रही है।

सो, माननीय नीतीश बाबू थोड़ा दरभंगा पर ध्यान दीजिए, एक गो सीट आपके खाते में यहां से भी गया है। रोड़-वोड ठीक करवाइए, काहे हम लोगों को हिचकोला खिलाने पर तुले हैं।

4 comments:

अंशुमाली रस्तोगी said...

पहले वे अपनी सड़क बनवाएंगे फिर, अगर वक्त मिला, तो बिहार की खस्ताहाल सड़कों की खबर लेंगे। तब तक इंतजार कीजिए।

sushant jha said...

आज मैं भी काफी दिनों के बाद अपने एक रिश्तेदार से बात कर रहा था,उनकी भी यहीं राय थी। उनका कहना था कि बिहार का उत्तरी इलाका तो बिल्कुल ही बदहाल है। अगर आप गंगा के तटवर्ती इलाकों में जाते हैं तो फिर भी कुछ राहत है। उन्होने कहा कि हालात तो 10 साल पहले से भी खराब लग रहे हैं-वे अब दिल्ली में रहती हैं लेकिन उनके बच्चों के लिए दरभंगा बड़ा ही झेलाऊ जगह हो गया है।पता नहीं हमारी सरकार क्या कर रही है। लगता है कि वह सिर्फ मुख्य मार्गों को ही सुधारने में लगी है, शहरों की गलियां उसकी प्राथमिकता में नहीं है।

जयराम दास. said...

बड़े और समृद्ध शहरों में एक दरभंगा....हा हा हा हा ...अच्छा मजाक कर रहे हैं आप?

Vibha Rani said...

mera darbhanga 3 sal se jana nahi hua hai. magar 3 sal pahale halat sadak ki itani kharab nahi thi. pichhale sal munger jan ahua aur vaha ki sadak ka sundar roop dekh kar dang rah gai. mere hisab se har chiz par turant react karana thik nahi. pichhale saal paana me ek rilksha vale se bhi poochha ki kaun si sarakar tumhe achchhi laati hai, usane kaha tha. aaj ki sarakar. kam se kam dar to nahi lagat. jaan-maal ke lutane ka dar nahi. kisi bhi sarakar ke haath mein jaadoo ki chhadi nahi hoti. aur bihar, jo khandahr kramash: banata gaya, usake banane me time to lagega hi.