Saturday, November 22, 2008

चौंकिये मत! भारत में है एक पाकिस्तानी टोला

कल मैंने आपको अपने जिले के उस जगह की कहानी सुनाई थी, जहां हिंदू-मुस्लिम भाई चारा का पाठ पढ़ाया जाता है। आज उससे ठीक अलग एक कहानी आपको सुनाता हूं-

गिरीन्द्र


चौंकिये मत! यह हकीकत है। पूर्णिया जिले के श्रीनगर प्रखंड के सिंघिया पंचायत में बसा है पाकिस्तान नाम का गांव। चारो तरफ से जलधाराओं से घिरे इस टापूनुमा गांव के बगल से बहती एक जलधारा को यहां के लोग पाकिस्तानी धार के नाम से पुकारते है। इस गांव को लोग पाकिस्तानी टोला भी कहते है। सरकारी दस्तावेज में भी इस गांव का नाम पाकिस्तानी टोला ही दर्ज है और इसी नाम पर जमीन की खरीद-बिक्री होती है। ग्रामीणों की मानें तो गांव का पाकिस्तान नामकरण की वजह से ही यहां न तो अधिकारी पहुंचते है न ही विकास की किरण।

आजादी के दौरान भारत-पाक बंटवारे के बाद पाकिस्तान से कुछ कथित रिफ्यूजी यहां आकर बसे थे। फलस्वरूप आसपास के ग्रामीण इसे पाकिस्तानी टोला के नाम से संबोधित करने लगे। हालांकि अब वे सभी रिफ्यूजी यहां से पलायन कर चुके है। गांव के उत्तर दिशा में बहती जलधारा से वे रिफ्यूजी पानी का सेवन करते थे। इसी वजह से उसका नाम पाकिस्तानी धार होने का अनुमान लगाया जाता है।

कारी कोसी, मुरलिया धार व पाकिस्तानी धार से घिरे इस गांव में केवल संथाल बसे है। बरसात के दिनों में यहां पहुंचना बेहद मुश्किल है। विकास से कोसों दूर इस गांव के सुरेन्द्र कुमार टुडू, अशोक हांसदा, गुरु बिसरा, सुफल मुर्मू ने बताया कि गांव का नाम पाकिस्तान होने तथा इन्हे पाकिस्तानी समझने के कारण यहां न कोई अधिकारी और जनप्रतिनिधि नहीं आते है, जबकि पाकिस्तानी रिफ्यूजियों के पलायन के बाद दुमका से संथाल जाति के लोग यहां आकर बसे थे।

अब मैं कुछ अपनी बात कहना चाहता हूं। आप इसे मेरा सवाल मान सकते हैं। सवाल यह है कि क्या गांव का नाम पाकिस्तान होने की वजह से उसका विकास नहीं हो सकता? क्या सिर्फ नाम के कारण ग्रामीण अशिक्षित रह सकते है? क्या केवल नाम के कारण मांग के बावजूद उस गांव को एक नाव उपलब्ध नहीं कराया जा सकता?

यह उसी इलाके में है, जिसके बारे में फणीश्वर नाथ रेणु ने मैला आंचल में उल्लेख किया है। उनके एक खास दोस्त यहां रहा करते थे और उनकी एक पोती भी इसी गांव में ब्याही गई है।

4 comments:

ummed Singh Baid "saadahak " said...

खूब फ़ंसाया आपने, हुई बोलती बन्द.
इस-उस पाकिस्तान में आना-जाना बन्द.
आना-जाना बन्द, कि हम तो यह भी भूले.
राम-पुत्र लव का लाहौर, रावी-तट भूले.
कह साधक पढ लेख आपका, अब याद आया.
हुई बोलती बन्द आपने खूब आपने खूब फ़ंसाया.

विवेक सिंह said...

सचमुच चौंकाने वाली बात बताई आपने .आभार !

Mired Mirage said...

दुखद बात है ।
घुघूती बासूती

संदीप पाण्डेय said...

shandar jaankaaree ke liye abhaar girindra bhai