Friday, July 31, 2026

न विधायक न MLC, फिर कैसे मंत्री बने हुए हैं?

क्या कोई व्यक्ति बिना विधायक या विधान परिषद सदस्य बने लंबे समय तक मंत्री बना रह सकता है? क्या संविधान में दी गई 6 महीने की छूट को बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है? यह वैधानिक सवाल इन दिनों देश के सर्वोच्च न्यायालय के सामने आया है।

बिहार सरकार के मंत्री दीपक प्रकाश के मामले में देश की सर्वोच्च न्यायालय ने बेहद अहम टिप्पणी करते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने साफ कहा कि यह पूरी तरह कानून की व्याख्या का मामला है और राज्य सरकार को बताना होगा कि कोई व्यक्ति छह महीने से अधिक समय तक निर्वाचित हुए बिना मंत्री पद पर कैसे बना रह सकता है। इस टिप्पणी के बाद बिहार की राजनीति के साथ-साथ संवैधानिक मामलों के जानकारों की नजर भी इस मामले पर टिक गई है।

सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को बिहार के मंत्री दीपक प्रकाश से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से सवाल करते हुए कहा कि बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश राज्य विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं है। फिर भी वह 6 महीने से ज्यादा समय से अपने पद पर कैसे बने हुए हैं।

याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत से याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि छह महीने से ज्यादा समय बीत चुका है। दीपक प्रकाश न विधायक हैं और न ही एमएलसी, इसके बावजूद वह मंत्री पद पर बने हुए हैं। वकील ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में दखल लेने की अपील करते हुए कहा, 'माई लॉर्ड, अब छह महीने से ज़्यादा हो गए हैं। वह मंत्री बने हुए हैं।'

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह मामला पूरी तरह से कानून से जुड़ा है। राज्य सरकार को यह बताना होगा कि दीपक प्रकाश कुशवाहा, जो विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य नहीं है, वो किस संवैधानिक आधार पर छह महीने से ज्यादा समय तक मंत्री पद पर बने हुए हैं? मंत्री बने रहने की अनुमति देने का संवैधानिक आधार क्या है।

यह याचिका दीपक प्रकाश के राज्य विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य न होने के बावजूद बिहार के पंचायती राज मंत्री के तौर पर बने रहने की संवैधानिक वैधता से जुड़ी है।

इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता और व्हिसलब्लोअर राकेश कुमार सिंह की ओर से दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर बिहार सरकार को नोटिस जारी किया था। याचिका में बिहार में नई सम्राट सरकार बनने के बाद दीपक प्रकाश की मंत्री के तौर पर दोबारा नियुक्ति को चुनौती दी गई थी।

याचिका में संविधान के अनुच्छेद 164(4) से जुड़ा एक अहम संवैधानिक सवाल उठाया गया है, जो किसी ऐसे व्यक्ति को, जो विधायक नहीं है, अधिकतम छह महीने तक मंत्री के तौर पर काम करने की अनुमति देता है; इस अवधि के भीतर उस व्यक्ति को विधायिका का सदस्य बनना ज़रूरी होता है।

क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 15 अप्रैल, 2026 को पद छोड़ने से पहले दीपक प्रकाश ने पंचायती राज मंत्री के रूप में चार महीने और 26 दिनों तक कार्य किया, जिसके साथ ही उनका कार्यकाल समाप्त हो गया।

इसके बाद अगले 22 दिनों तक उन्होंने कोई भी मंत्री पद नहीं संभाला। 7 मई, 2026 को सम्राट चौधरी द्वारा नई सरकार बनाने के बाद, प्रकाश ने निर्वाचित न होने के बावजूद फिर से मंत्री पद की शपथ ली।

इसके बाद 30 मई को दायर याचिका में उनकी नियुक्ति को अमान्य घोषित करने की मांग की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि यह संविधान के साथ धोखाधड़ी है। क्योंकि, दीपक प्रकाश अब तक कुल मिलाकर छह महीने से अधिक समय से पद पर बने हुए हैं, जबकि वे किसी भी सदन के लिए निर्वाचित नहीं हुए हैं।

क्या कहता है कानून?
अनुच्छेद 164(4) प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री द्वारा नियुक्त किए जाने पर मंत्रियों को निर्वाचित होने के लिए छह महीने की छूट अवधि प्रदान करता है। इसमें कहा गया है, "कोई भी मंत्री जो लगातार छह महीनों की अवधि के लिए राज्य के विधानमंडल का सदस्य नहीं है, उस अवधि की समाप्ति पर मंत्री नहीं रहेगा।"

इसलिए, यदि कोई मंत्री छह महीने की अवधि के भीतर निर्वाचित नहीं होता है, तो उसे पद से इस्तीफा देना होगा।

क्यों अलग है बिहार का मामला?
बिहार का मामला इसलिए अलग है क्योंकि मंत्री दीपक प्रकाश ने लगातार छह महीने तक पद पर कार्य नहीं किया है। नीतीश कुमार के नेतृत्व में वे चार महीने और 26 दिन तक मंत्री रहे, जो छह महीने की छूट अवधि के भीतर था। इसके बाद सीएम स्रमाट चौधरी द्वारा फिर से नियुक्त किए जाने के बाद से दीपक प्रकाश ने कुछ महीने ही सेवा की है। लेकिन कुल मिलाकर, वे बिना निर्वाचित हुए छह महीने से अधिक समय तक मंत्री पद पर बने रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल
बता दें कि किसी मंत्री के पदभार ग्रहण करने के महीनों बाद उसे निर्वाचित कराने की प्रथा अपने आप में विवादास्पद नहीं है। लेकिन सवाल यह है कि क्या किसी मंत्री के लिए छह महीने की समय सीमा से पहले इस्तीफा देना, कुछ दिनों बाद फिर से पदभार ग्रहण करना और यह दावा करना कि छह महीने की अवधि नए शपथ ग्रहण की तारीख से फिर से शुरू हो जाएगी, यह कानूनी रूप से कितना सही है?

आने वाले 4 अगस्त को दीपक प्रकाश केस में सुप्रीम कोर्ट का फैसला केवल एक मंत्री की कुर्सी का फैसला नहीं होगा। इससे यह स्पष्ट होगा कि क्या छह महीने की संवैधानिक छूट दोबारा ली जा सकती है या नहीं। यदि कोर्ट कहती है कि दोनों कार्यकाल जोड़कर अवधि गिनी जाएगी तो भविष्य में कोई भी सरकार इस तरह की नियुक्ति नहीं कर सकेगी। वहीं यदि कोर्ट नई शपथ के साथ नई छह महीने की अवधि मानती है तो यह संविधान की नई न्यायिक व्याख्या होगी, ऐसे में 4 अगस्त की सुनवाई पर सिर्फ बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश की राजनीतिक और कानूनी नजरें टिकी रहेंगी।

Friday, July 24, 2026

सबकी निगाहें दिल्ली पर!





नीट पेपर लीक और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच गुरुवार देर रात जहां एक ओर प्रधानमंत्री खुद सोशल मीडिया पर संदेश देते दिखे, वहीं आखिरकार 26 दिन बाद सोनम वांगचुक ने भी अपना अनशन तोड़ दिया। लेकिन निगाह अभी भी देश की छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर ही है।

ऐसे में सवाल यही है कि अब आज क्या होगा?

ऐसा माना जा रहा है कि शुक्रवार का दिन भी काफी हलचल भरा रहने वाला है। दरअसल शुक्रवार को ही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने देशव्यापी प्रदर्शन का ऐलान किया है।
CJP ने एक पोस्टर जारी कर लोगों से सभी जिलों और शहरों में शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अपील की है। कॉकरोच पार्टी ने कल एक नया नारा भी दिया- 'Every District. One Day. One Demand'

इस पार्टी ने देशव्यापी प्रदर्शन में जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ मारपीट का विरोध करने की अपील की गई है।

शुक्रवार को CJP के प्रदर्शन को लेकर दिल्ली में सुरक्षा चाक-चौबंद कर दी गई है। दिल्ली मेट्रो ने सुबह 7:30 बजे से ही 16 मेट्रो स्टेशन भी बंद कर दिए हैं। हालांकि इस वजह से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

जैसा कि कल देर रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों के नाम एक वीडियो जारी किया था, जिसमें उन्होंने भरोसा दिलाया कि पेपर लीक जैसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को कैबिनेट में पेपर लीक के खिलाफ और सख्त फैसला लिया जाएगा।

ऐसे में आज हम सभी की निगाहें कैबिनेट मीटिंग पर भी होगी। यह मीटिंग इसलिए अहम है, क्योंकि इसमें पेपर लीक को लेकर सख्त फैसला लिया जा सकता है। क्योंकि पीएम मोदी ने वीडियो संदेश में बताया कि फास्ट ट्रैक कोर्ट और कठोर सजा के प्रावधान के साथ मसौदे पर शुक्रवार को कैबिनेट में चर्चा होगी। उन्होंने बताया कि इस बिल को जल्द से जल्द सदन में पास कराया जाएगा।

कल देर शाम के घटनाक्रम को लेकर हर कोई अपने-अपने अंदाज में सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। दरअसल सरकार ने पेपर लीक से जुड़े मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट भी बना दी और आखिरकार 26 दिन बाद सोनम वांगचुक ने अनशन भी तोड़ दिया। इससे पहले शिक्षा सचिव का भी ट्रांसफर हुआ।


गौरतलब है कि सोनम वांगचुक ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नीट पेपर लीक को लेकर जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन के समर्थन में 28 जून को अनशन शुरू किया था। इसी बीच तबीयत खराब होने के बाद सोनम को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर सोनम को मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

अनशन तोड़ने के बारे में गुरुवार रात सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "अभी-अभी केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह तथा लेह-लद्दाख की सर्वोच्च समिति के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में मैंने 26 दिनों के बाद अपना अनशन तोड़ा। इससे पहले विभिन्न राजनीतिक दलों के 65 सांसदों ने मुझसे मुलाकात की थी या पत्र लिखकर मुझसे अनशन तोड़ने का आग्रह किया था। यह देश में संभावित हिंसा को देखते हुए और विभिन्न शर्तों पर लंबी बातचीत के बाद किया गया। मैं जल्द ही एक अलग वीडियो में इन शर्तों का विस्तार से वर्णन करूंगा। इस बीच, मैं आप सभी से आग्रह करता हूं कि किसी भी प्रकार की हिंसा को रोकने के लिए पूरी तरह सतर्क रहें।"

शिक्षा सचिव का तबादला
बदलते घटनाक्रम के बीच गुरुवार रात केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय में शिक्षा सचिव विनीत जोशी का ट्रांसफर कर दिया। उनकी जगह नरेश पाल गंगवार को शिक्षा विभाग का नया सचिव नियुक्त किया गया। विनीत जोशी को अब पंचायती राज मंत्रालय का सचिव बनाया गया है। उनके साथ-साथ 10 और सीनियर आईएएस अधिकारियों के तबादले किए गए।

इन्हीं सबके बीच गुरुवार रात को पेपर लीक से जुड़े मामलों के ट्रायल के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट को नोटीफाई किया गया। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाई जाएगी। दिल्ली हाई कोर्ट ने तीस हजारी कोर्ट के मीडिएशन सेंटर की इंचार्ज जज जस्टिस अनु ग्रोवर बालीगा का तबादला राउज एवेन्यू कोर्ट में स्पेशल जज के तौर पर किया है। पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई यही करेंगी।

दूसरी तरफ नीट पेपर लीक मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देर रात जारी किए गए वीडियो पर लोकसभा में नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सवाल उठाए हैं। राहुल गांधी ने सरकार के सामने प्रमुखता से तीन मांगें रखी हैं और देर रात जारी किए गए वीडियो को लेकर पीएम मोदी पर निशाना साधा।

राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, "मिस्टर मोदी, हमारे छात्र धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं. आधी रात को जारी इस बेकार वीडियो से उनकी समझदारी का अपमान न करें।"

राहुल गांधी ने आगे कहा कि सरकार इन तीन मांगों को पूरा करे। इनमें पहली और मुख्य मांग है धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।

राहुल गांधी की दूसरी मांग है संसद चलो मार्च के दौरान छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर, उनका कहना है कि जिन्होंने भी छात्रों को पीटा है उन सभी को सजा दी जाए। राहुल गांधी की तीसरी मांग है कि सरकार इन छात्रों से माफी मांगे. इससे पहले राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मोदी सरकार पर गंभीर सवाल उठाए थे।





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Friday, July 17, 2026

धनरोपनी महोत्सव के बहाने बात धान की!




बच्चों को प्रकृति से जोड़ने का प्रयास हर व्यक्ति को करना चाहिए, खासकर खेती- बाड़ी की दुनिया से शहरी बच्चों को रूबरू कराते रहना चाहिए। भागमभाग भरी जीवन शैली में किसानी की दुनिया से नई पीढ़ी को परिचित कराना भी हम सबका काम है। इसी कड़ी में गांव में धनरोपनी उत्सव को करीब से बच्चों को दिखाने का काम किया गया, जिसकी शुरुआत एक दशक पहले चनका रेसीडेंसी ने की थी।  
हमारे यहां धान को बेटी का दर्जा प्राप्त है। धान हमारे लिए फसल भर नहीं है, वो हम सबके लिए ‘धान्या’ है। धान की बाली हमारे घर को ख़ुशी से भर देती है। साल भर वो कितने प्यार से हमारे घर आँगन को सम्भालती है। आँगन के चूल्हे पर भात बनकर या दूर शहरों में डाइनिंग टेबल पर प्लेट में सुगंधित चावल बनकर, धान सबका मन मोहती है।

हमारे अंचल में पहले धान का नाम बहुत ही प्यारा हुआ करता था, मसलन 'पंकज' 'मनसुरी', 'जया', 'चंदन', 'नाज़िर', 'पंझारी', 'बल्लम', 'रामदुलारी', 'पाखर', 'बिरनफूल' , 'सुज़ाता', 'कनकजीर' , 'कलमदान' , 'श्याम-जीर', 'विष्णुभोग' आदि। समय के साथ हाइब्रीड ने किसानी की दुनिया बदल दी। एक किसान के तौर पर मन तो यही करता है कि उन पुराने बीज को इकट्ठा कर पूर्णिया का बीज बैंक बनाया जाए, जहां हम अपने अंचल के धान को एक ब्रांड के तौर पर पेश करते।

बीज बैंक के बारे में लिखते हुए मुझे असम के जोरहाट के किसान मोहान चन्द्र बोरा याद आ रहे हैं। उन्होंने अन्नपूर्णा सीड लाइब्रेरी बनाई है, जहां धान की 270 किस्म के बीज हैं।  

धान की रोपनी और कटाई की बात जब भी होती है तो मन में कई गीत भी गूंजने लगते हैं जो अब खेत में सुनाई नहीं देते हैं। सुख की तलाश हम फसल की तैयारी में ही करते हैं। एक गीत पहले सुनते थे, जिसके बोल कुछ इस तरह हैं -
"सब दुख आब भागत, कटि गेल धान हो बाबा..."

हम खेती किसानी दुनिया के लोग अन्न की पूजा करते हैं। धान की जब भी बात होती है तो जापान का जिक्र जरूर करता हूं। जापान के ग्रामीण इलाक़ों में धान-देवता इनारी का मंदिर होता ही है।

जापान में एक और देवता हैं, जिनका नाम है- जीजो। जीजो के पांव हमेशा कीचड़ में सने रहते हैं। कहते हैं कि एक बार जीजो का एक भक्त बीमार पड़ गया, भगवान अपने भक्तों का खूब ध्यान रखते थे। उसके खेत में जीजो देवता रात भर काम करते रहे तभी से उनके पांव कीचड़ में सने रहने लगे।

धान हमारे घर में ख़ुशहाली लाती है। मंहगाई और तमाम तरह की राजनीतिक उलट-बांसी के बीच किसानी की बात हमें उम्मीद से भर देती है और हम पूर्णिया से असम और जापान की बात करने लगते हैं जिसके केंद्र में केवल और केवल धान ही है।

जापान की दो प्रमुख कम्पनियां होंडा और टोयोटा का अर्थ धान होता है। होंडा का मतलब मुख्य धान खेत और टोयोटा का मतलब बम्पर फसल वाला धान खेत। जापान में एक हवाई अड्डा है- नरीटा, इसका अर्थ है लहलहाता धान खेत।

दरअसल जापान में धान को प्रधानता दी जाती है। ऐसी बात नहीं है कि वहां अन्य फसलों की खेती नहीं होती है लेकिन यह बड़ी बात है कि वहां खेत का अर्थ धान के खेत से जुड़ा है। वहां धान की आराधना की बड़ी पुरानी परंपरा है।
हम भी धान को कम स्नेह नहीं देते। हमारे यहां तो धान को बेटी का दर्जा प्राप्त है। धान हमारे घर में ख़ुशहाली लाती है। बौद्ध साहित्य से पता चलता है कि गौतम बुद्ध के पिता का नाम था- शुद्धोदन यानी शुद्ध चावल। वट वृक्ष के नीचे तप में लीन गौतम बुद्ध ने एक वन-कन्या सुजाता के हाथ से खीर खाने के बाद बोध प्राप्त किया और बुद्ध कहलाए. इस कहानी को पढ़कर लगता है शायद इसी वजह से 70 के दशक में पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ इलाक़ों में एक पुरानी नस्ल की धान का नाम 'सुज़ाता' होगा। इस धान का चावल बहुत ही सुगन्धित हुआ करता था।

गूगल करिएगा तो पता चलेगा कि दुनिया का 90 प्रतिशत धान एशिया में ही उगाया और खाया जाता है। धान के पौधे को हर तरह की जलवायु पसंद है. नेपाल और भूटान में 10 हजार फुट से ऊंचे पहाड़ हों या केरल में समुद्रतल से भी 10 फुट नीचे पाताल-धान दोनों जगह लहराते हैं। ऐसे में जापान ने धान और धान के खेतों की जो ब्रांडिंग की है इसपर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

वैसे आपने कभी इस बात का पता लगाया है कि धान के नाम पर अपने देश में कोई कंपनी है या फिर कोई व्यावसायिक प्रतिष्ठान है? सारी लड़ाई अन्न को लेकर है। हम सभी अपनी ज़िंदगी सुख-चैन से जीने के लिए मेहनत करते हैं ताकि डाइनिंग टेबल पर हम भोजन कर सकें और दूसरों को भी खिला सकें लेकिन दूसरी ओर खेतों में लहलहाती फ़सलों के नाम पर क्या हम किसी कम्पनी का नाम नहीं रख सकते? या अपने घर का नाम हम धान- गेहूं- मक्का- गन्ना के उन्नत नस्लों के नाम पर नहीं रख सकते?

खेती – किसानी की दुनिया से नई पीढ़ी को करीब लाने के उदेश्य से 2014 में जब चनका रेसीडेंसी ने धनरोपनी उत्सव की शुरुआत की थी तो इस बात अंदाजा नहीं था कि यह कारवां बढ़ता ही चला जाएगा। इस बार भी हमने धन-रोपनी महोत्सव आयोजित किया। इस बार की धन रोपनी कई मायनों में खास रही क्योंकि इसमें बिहार बाल भवन किलकारी के कला प्रेमी बच्चों ने न केवल हिस्सा लिया बल्कि धान रोपाई से सम्बन्धित गीतों को अपनी आवाज़ भी दी।

धान के बहाने यह कहानी हमने इसी कारण सुनाई क्योंकि अन्न ही जीवन है और अन्न को हम सबके घर तक पहुंचाने वाले किसानी दुनिया के लोगों के जीवन से हम सब दूर होते जा रहे हैं। ऐसे में जब भी आप बरसात के इस मौसम किसी गांव के करीब से गुजरिएगा तो एक बार जरूर किसी खेत के पास ठहरने का काम करिएगा, ताकि आप भी समझ सकें, कैसी है किसानों की दुनिया, किस रंग में हैं धान के खेत ! 




Girindra Nath Jha
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अमित शाह का दो दिवसीय बंगाल दौरा: सीमा सुरक्षा को मजबूत करने पर रहेगा जोर, आला अधिकारियों के साथ करेंगे बैठक

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 17 से 19 जुलाई तक बंगाल के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी और राजधानी कोलकाता में सीमा सुरक्षा, कानून-व्यवस्था, नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन तथा विभिन्न विकास परियोजनाओं की समीक्षा करेंगे। साथ ही कई कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेंगे।
प्रदेश भाजपा द्वारा जारी निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार गृह मंत्री शुक्रवार रात नौ बजे उत्तर बंगाल के बागडोगरा हवाई अड्डे पर पहुंचेंगे।

वहां से वह सिलीगुड़ी के कदमतला स्थित सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के उत्तर बंगाल फ्रंटियर मुख्यालय जाएंगे, जहां वह रात्रि विश्राम करेंगे।

अगले दिन 18 जुलाई, शनिवार को वह सुबह साढ़े 11 बजे जुमागाछ स्थित बीएसएफ की 18वीं बटालियन की सीमा चौकी पहुंचेंगे। यहां प्रहरी सम्मेलन में भाग लेने के साथ पौधारोपण करेंगे तथा विभिन्न परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे। वह सीमा प्रहरियों से संवाद भी करेंगे।

इसके बाद सिलीगुड़ी स्थित उत्तरकन्या सभागार में विभिन्न समीक्षा बैठकों में हिस्सा लेंगे। इनमें प्रशासनिक बैठक, बंगाल में नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन की समीक्षा तथा जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था को लेकर बैठक शामिल है। शनिवार शाम को गृह मंत्री कोलकाता पहुंचेंगे और यहां अलीपुर स्थित सरकारी सौजन्य गेस्ट हाउस में रात्रि विश्राम करेंगे।

19 जुलाई, रविवार को अमित शाह सौजन्य गेस्ट हाउस में बंगाल की कानून-व्यवस्था को लेकर उच्चस्तरीय बैठक करेंगे। इसके बाद वह अलीपुर स्थित राष्ट्रीय पुस्तकालय में नवनिर्मित देश के पहले वर्ड म्यूजियम का उद्घाटन करेंगे।

दौरे के अंतिम कार्यक्रम में गृह मंत्री कोलकाता के न्यूटाउन स्थित विश्व बंगला कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हावड़ा जिले के सांकराइल में अमूल डेयरी के प्रस्तावित दुनिया के सबसे बड़े दही संयंत्र की आधारशिला रखेंगे।

Friday, July 10, 2026

आखिर क्यों महत्वपूर्ण साबित होगी ‘बॉर्डर डिस्ट्रिक्ट SPs कॉन्फ्रेंस-2026’ !

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार नौ जुलाई को नई दिल्ली में सीमावर्ती जिलों के पुलिस अधीक्षकों के साथ एक बैठक की। इस महत्वपूर्ण बैठक का नाम ‘बॉर्डर डिस्ट्रिक्ट SPs कॉन्फ्रेंस-2026’ दिया गया था। सम्मेलन में बॉर्डर से लगते 119 जिलों के एसपी और अन्य अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में जम्मू-कश्मीर, पंजाब, उत्तराखंड, राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्य सहित सीमावर्ती राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस अधीक्षक शामिल हुए थे।

माना जा रहा है कि इस बैठक में अवैध घुसपैठ पर लगाम लगाने के प्लान पर सबसे अधिक चर्चा हुई। देश में अवैध घुसपैठिया के नेटवर्क को खत्म करने पर अमित शाह लगातार बोलते रहे हैं। ऐसे में यह मीटिंग अहम मानी जा रही थी , क्योंकि देश को नक्समु्क्त बनाने के बाद मोदी सरकार अब अवैध घुसपैठ पर एक्शन की तैयारी में है।

गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में घुसपैठ, अवैध आप्रवासन, आबादी में बदलाव, बॉर्डर सिक्योरिटी, ड्रोन से खतरा और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। यह बैठक अवैध आप्रवासन के खिलाफ केंद्र के तेज अभियान के बीच अहम है। केंद्र ने इसे बांग्लादेश के साथ अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर स्थित जिलों की आबादी की बनावट को बदलने की एक संगठित कोशिश का हिस्सा बताया है। बैठक में सुरक्षा से जुड़ी नई चिंताओं को उजागर कर और इन चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के उपायों पर विचार-विमर्श किया गया।

सीमांत जिला पुलिस अधीक्षक सम्मेलन-2026 को संबोधित करते हुये अमित शाह ने कहा कि इस सम्मेलन से समग्र सीमा सुरक्षा के दृष्टिकोण को संस्थागत रूप मिला है और आने वाले समय में तटीय सीमा सुरक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में भी हम समग्रता से आगे बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में सीमाओं की सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा, निराकरण की चिंता और इस दिशा में उपयुक्त उपायों को नीतिगत स्वरूप देने का काम होगा। मोदी सरकार, संबद्ध सीमा रक्षक बल, राज्य और जिला प्रशासन, भारत सरकार के संबंधित हितधारक और स्थानीय नागरिकों के परस्पर जुड़ाव के साथ एक मजबूत चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड का निर्माण कर रही है।

केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने कहा, ‘स्मार्ट बॉर्डर की कल्पना पर आधारित भारत की बॉर्डर सुरक्षा व्यवस्था आने वाले समय में विश्व में सबसे आधुनिक होगी। सुरक्षित सीमा, समृद्ध सीमांत और सजग समाज के साथ ही देश सुरक्षित हो सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश को जम्मू-कश्मीर और नॉर्थईस्ट में आतंकवाद और नक्सलवाद से निजात मिली है, जो हमारी साझी सफलता का सूचक है। आने वाले तीन सालों में हम नारकोटिक्स की समस्या को गंभीर क्षति पहुंचाकर इस पर विजय प्राप्त करेंगे। ’

उन्होंने कहा, ‘देश को घुसपैठियामुक्त बनाने और घुसपैठ हो ही न सके, इसके लिए एक मजबूत तंत्र का निर्माण कर रहे हैं। पहले समस्याएं स्थायी और समाधान अस्थायी थे, मोदी सरकार में समस्याओं की जड़ पर प्रहार कर समाधानों को स्थायी बनाया जा रहा है. मोदी सरकार ने बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर में 400 प्रतिशत वृद्धि कर वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ इसे आगे बढ़ाया है।’

अमित शाह ने कहा, ‘पीएम मोदी ने वायब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम के तहत देश के अंतिम गांव को देश का प्रथम गांव कहा है. इसके तहत पलायन रोकने, रोजगार बढ़ाने और सरकारी योजनाओं का शत प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है. मोदी ने जनसांख्यिकी परिवर्तन का अध्य्यन करने, उसमें असामान्य कारणों से हो रही वृद्धि को चिह्नित करने और भविष्य में इसे रोकने के उपाय सुझाने के लिए डेमोग्राफी मिशन की शुरूआत की है।‘

केंद्रीय गृह मंत्री ने सीमांत क्षेत्रों में असामान्य कारणों से जनसांख्यिकी में हो रहे बदलाव की सूचना जल्द से जल्द नीचे से उच्चतम स्तर तक पहुंचाने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा, ‘मोदी सरकार 31,000 करोड़ रुपये की लागत से 1,610 किलोमीटर लंबे म्यांमार बॉर्डर पर बाड़बंदी कर रही है।’

उन्होंने कहा, ‘प्रॉक्सी वार, घुसपैठ, कट्टरपंथ का प्रसार, नारकोटिक्स, तस्करी, ड्रोन, साइबर अपराध, संगठित अपराध और जनसांख्यिकीय परिवर्तन रोकना, सीमा को रहने लायक बनाना और वहां से पलायन रोकना और सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारे उद्देश्य है।’ 

अमित शाह लगातार कहते रहे हैं कि हम एक ऐसा मजबूत सुरक्षा तंत्र बना रहे हैं। जिससे देश को घुसपैठियां मुक्त करने के साथ ही घुसपैठ ही नहीं हो सकेगी। गुरुवार को हुई बैठक में भी उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि जिस तरह से देश को जम्मू कश्मीर और नॉर्थ-ईस्ट में आतंकवाद और नक्सलवाद से निजात मिली है। घुसपैठ को रोकने के साथ ही आने वाले 3 सालों में सरकार नारकोटिक्स की समस्या पर भी विजय प्राप्त करेगी। 

गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दिमाग में सीमांत (बॉर्डर) जिलों की सुरक्षा और डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी) को संतुलित रखने की सबसे बड़ी प्राथमिकता चल रही है। उनके मुख्य विजन और रणनीतियों में शामिल है। वे सीमावर्ती जिलों में हो रहे असामान्य जनसंख्या परिवर्तन और अवैध घुसपैठ के मूल कारणों का पता लगाने और सुधार के लिए एक विशेष मिशन की शुरुआत कर चुके हैं। ऐसे में इस बैठक के बाद सीमांत जिलों में होने वाली घटनाओं पर सबकी निगाहें रहेंगीं।

पंजाब :धर्म और पंथ की रणनीति से लेकर लोक लुभावन योजना तक!




पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार को धुरी से बहुप्रतीक्षित ‘मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना' लॉन्च की. लाभार्थी महिलाओं के खातों में तीन महीने की सम्मान राशि एकमुश्त जमा की गई. योजना के तहत पंजाब की महिलाओं के खाते में 1000-1500 रुपये हर महीने दिए जाने हैं. सामान्य वर्ग की महिलाओं को 1000 रुपये, और अनुसूचित जाति की महिलाओं को 1500 रुपये . 

आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल
ने मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना को दुनिया का सबसे बड़ा महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम बताया था. सोशल साइट एक्स पर अरविंद केजरीवाल ने लिखा, पंजाब की सभी मां, बहनों और बेटियों को बहुत-बहुत बधाई. 1 जुलाई को उनके खाते में तीन महीने के पैसे एक साथ आएंगे. हर जनरल कैटेगरी की महिला को तीन हजार और हर SC कैटेगरी की महिला को 4500 रुपये मिलेंगे. एक परिवार में यदि एक से अधिक महिलाएं हैं, तो हर महिला को ये सम्मान राशि मिलेगी. पूरी दुनिया का ये सबसे बड़ा महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम है.

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर 8 मार्च को विधानसभा के विशेष सत्र में इस योजना की घोषणा की थी. उसके बाद वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में इस योजना के लिए 9300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया. पंजाब सरकार का दावा है कि योजना से पंजाब की करीब 97 फीसदी वयस्क महिलाओं को फायदा मिलेगा.

इस हफ्ते पंजाब की इस घटनाक्रम को देखकर आपको असम की याद आई होगी. देखा जाए तो भगवंत मान भी असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के रास्ते पर चल रहे हैं. असम चुनाव से पहले हिमंता बिस्वा सरमा ने महिलाओं को बिहू के मौके पर एकमुश्त बड़ी रकम की सौगात दी थी. 

आम आदमी पार्टी की सरकार ने दिल्ली में महिलाओं के लिए योजना शुरू की थी, लेकिन वक्त रहते उस पर अमल नहीं हो सका. लगता है, भगवंत मान दिल्ली में आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल की हार से सबक लेते हुए चुनाव से पहले ही महिलाओं के खाते में पैसा भेजने का फैसला किया है. 

चुनावी राजनीति में जनता तक रकम की सौगात पहुंचाने की कहानी अब हर राज्य में चुनाव से पहले देखने को मिल रही है, ऐसे में पंजाब की सरकार भी क्यों पीछे रहती! 

इन सब लोक लुभावन योजनाओं के बीच पंजाब की राजनीति धर्म और पंथ के इर्द-गिर्द भी घूमने लगी है। पिछले कुछ दिनों के भीतर ऐसे कुछ सियासी घटनाक्रम सामने आए हैं जिनका असर निश्चित ताैर पर भावी चुनाव पर पड़ेगा। इसी के मद्देनजर राजनीतिक पार्टियां भावी समीकरणों से नफा और नुकसान के आकलन में जुट गई हैं।

दलों को जहां पंथक वोट बैंक बिखरने की आशंका सता रही हैं वहीं सिख-हिंदू एकता पर भी दलों की नजर गड़ी है।

पंजाब में सिख और हिंदू के बिखराव की बात कोई नहीं करेगा क्योंकि जीत के लिए यहां दोनों समुदाय के लोगों का वोट बेहद जरूरी है। यहां हिंदू और मुसलमान का शोर भी नहीं सुनाई देगा मगर फिर भी सियासत धूरी धार्मिक समीकरणों के आसपास ही घूमेगी।

शिरोमणि अकाली दल (शिअद) प्रदेश की सबसे पुराने पंथक पार्टी मानी जाती है मगर साल 2022 के बाद से थोड़ा हाशिये पर चल रही है। पहला झटका तब लगा जब शिरोमणि अकाली दल (वारिस पंजाब दे) का गठन हुआ और दूसरी चोट शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) ने पहुंचाई। इस दौरान शिअद बिखरा और कुछ दिन पहले ही दाखा से शिअद के विधायक मनप्रीत सिंह अयाली भी शिरोमणि अकाली दल (वारिस पंजाब दे) के खेमे में चले गए। अयाली बड़े पंथक नेता माने जाते हैं, जो जाहिर तौर पर शिअद को नुकसान पहुंचाकर वारिस पंजाब दे को मजबूत करेंगे। इस घटनाक्रम के बाद पंथक वोट बैंक का बिखराव निश्चित माना जा रहा है।

दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी पिछले दिनों से कुछ बड़े पंथक मसलों से संबंधित विवादों में उलझी हुई है। पहला विवाद बिना एसजीपीसी और श्री अकाल तख्त की रायशुमारी के सूबे में नया बेअदबी रोधी संशोधन कानून लागू कराना और दूसरा विवाद सीएम भगवंत सिंह मान की कथित विवादित वायरल वीडियो से जुड़ा है।

दोनों मामलों में श्री अकाल तख्त साहिब ने संज्ञान लेकर सीएम के खिलाफ हुक्मनामा जारी किया है। आप हाईकमान को लगता है कि इससे पंथक वोट बैंक का नुकसान हो सकता है, लिहाजा पार्टी ने अब हिंदू वोट बैंक पर भी पूरी नजरें गढ़ा ली हैं। पिछले दिनों हिंदू समुदाय के लोगों से जुड़ी पांच बड़ी घोषणाएं इसी का नतीजा हैं।

भाजपा-कांग्रेस को भी मालूम है कि जीत के लिए हिंदू-सिख वोट बैंक बेहद जरूरी है। भाजपा यह भी जानती है कि सूबे में पंथक वोट बैंक हमेशा उनसे दूर ही रहा है मगर इस बार पार्टी की रणनीति थोड़ी अलग है। भाजपा कुछ पंथक नेताओं को पार्टी से जाेड़ रही है और अध्यक्ष पद का चेहरा भी इस बार सिख ही दिया है। इतना हीं नहीं पार्टी महाराजा रणजीत सिंह के सरकार-ए-खालसा समावेशी शासन मॉडल को उजागर करते हुए यह साबित करने की कोशिश की है कि राज्य में सामाजिक सद्भाव और व्यापक प्रतिनिधित्व के प्रति भाजपा पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

कांग्रेस के पास सिख नेताओं की कमी तो नहीं है मगर फिलहाल पंथक और हिंदू वोट बैंक पर पकड़ और बनानी पड़ेगी। कांग्रेस का फोकस जट सिख और एससी वोट बैंक पर ज्यादा हो सकता है।

बीते दिनों बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों के दफ्तर में महाराजा रणजीत सिंह की तस्वीर लगाकर पार्टी ने पंथक राजनीति को लेकर बड़ा संदेश देने की कोशिश की थी. 2011 की जनगणना के अनुसार पंजाब की कुल आबादी में सिख समुदाय की हिस्सेदारी करीब 58 प्रतिशत है, जबकि हिंदू आबादी लगभग 39 प्रतिशत है. ऐसे में राज्य की राजनीति में सिख वोट बैंक की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. पंजाब में अक्सर धार्मिक और पंथक मुद्दे चुनावी चर्चा के केंद्र में रहते हैं.

अब सामने विधानसभा चुनाव है! पंजाब के चुनाव पर सबकी नज़र है। आने वाले दिनों में पंजाब से ऐसे ही कई कहानियां सामने आएगी और चुनावी प्लेट के जायेके का रंग बदलने की कोशिश करेगी!

Girindra Nath Jha
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Friday, June 26, 2026

कौन हैं IPS महेश दीक्षित !


वरिष्ठ आइपीएस अधिकारी महेश दीक्षित इंटेलिजेंस ब्यूरो के नए प्रमुख होंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दे दी है।

आंध्र प्रदेश कैडर के 1993 बैच के आइपीएस अधिकारी दीक्षित वर्तमान आइबी निदेशक तपन कुमार डेका की जगह लेंगे।
वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी डॉ. महेश दीक्षित को देश की सबसे अहम आंतरिक खुफिया एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) का नया डायरेक्टर बनाया गया है. महेश दीक्षित 1993 बैच के आंध्र प्रदेश कैडर के IPS अधिकारी हैं. वे अब तक आईबी में स्पेशल डायरेक्टर के तौर पर अहम जिम्मेदारी संभाल रहे थे. दीक्षित मौजूदा आईबी प्रमुख तपन कुमार डेका की जगह लेंगे. डेका 2022 से आईबी की कमान संभाल रहे थे.


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दे दी है. कैबिनेट की नियुक्ति समिति द्वारा जारी आदेश में लिखा है कि कैबिनेट की अपॉइंटमेंट कमिटी ने इंटेलिजेंस ब्यूरो के स्पेशल डायरेक्टर, IPS महेश दीक्षित को इंटेलिजेंस ब्यूरो का डायरेक्टर बनाने को मंजूरी दे दी है. यह नियुक्ति आईपीएस तपन कुमार डेका की जगह पर होगी. उनका कार्यकाल पद संभालने की तारीख से दो साल या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, तक रहेगा.


कौन हैं महेश दीक्षित!

डॉ महेश दीक्षित देश के सबसे अनुभवी इंटेलिजेंस ऑफिसर्स में गिने जाते हैं. उनके करियर के सबसे अहम अध्यायों में से एक अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटाने से पहले की तैयारी में उनकी भूमिका थी. 

तत्कालीन राज्य के जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठन के बाद, दीक्षित को इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण इंटेलिजेंस जिम्मेदारियां सौंपी गईं. अधिकारियों का मानना ​​है कि उन्होंने राजनीतिक रूप से संवेदनशील दौर में जनता का भरोसा बहाल करने में मदद की और साथ ही आतंकवाद और अलगाववादी तत्वों से पैदा होने वाली सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया.

जम्मू-कश्मीर में अहम इंटेलिजेंस जिम्मेदारियां संभालने के दौरान, श्रीनगर ने 2023 में G20 टूरिज्म वर्किंग ग्रुप की बैठक की सफलतापूर्वक मेजबानी की. इस कार्यक्रम ने काफी अंतरराष्ट्रीय ध्यान और भागीदारी आकर्षित की. शिखर सम्मेलन का सुचारू संचालन क्षेत्र के बेहतर होते सुरक्षा माहौल को दिखाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना गया. इसी दौरान, कई विदेशी राजनयिक प्रतिनिधिमंडलों ने कश्मीर का दौरा किया, जो इस क्षेत्र के साथ बढ़ते अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव को दर्शाता है. इस मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया कि दीक्षित ने जमीनी हकीकत और बदलती परिस्थितियों का सही आकलन करने में अहम भूमिका निभाई. इससे कूटनीतिक स्तर पर बेहतर तालमेल बनाने और जमीनी हालात में भरोसे को मजबूत करने में मदद मिली.

यह नियुक्ति एक अहम मोड़ पर हुई है, क्योंकि भारत आतंकवाद और कट्टरपंथ से लेकर साइबर खतरों और सीमा पार से गलत सूचना फैलाने वाले अभियानों जैसी सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है. नए IB प्रमुख के तौर पर, दीक्षित से उम्मीद है कि वे आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने और विभिन्न सुरक्षा व इंटेलिजेंस एजेंसियों के बीच तालमेल बेहतर बनाने के मकसद से इंटेलिजेंस ऑपरेशन्स की देखरेख करेंगे.

आईपीएस महेश दीक्षित के पास जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में काम करने का गहरा अनुभव है। उन्होंने श्रीनगर में सब्सिडियरी इंटेलिजेंस ब्यूरो (SIB) के प्रमुख के रूप में आतंकवाद विरोधी अभियानों का नेतृत्व किया था, जिसका अधिकार क्षेत्र पूरे जम्मू, कश्मीर और लेह लद्दाख तक फैला हुआ था। उनके इसी जमीनी और खुफिया ऑपरेशन्स के अनुभव को देखते हुए सरकार ने उन्हें देश की आंतरिक सुरक्षा की सबसे बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।

33 साल के करियर में मिले कई पुरस्कार

1993 के बैच के आईपीएस अधिकारी महेश दीक्षित को अपने 33 साल के पूरे कार्यकाल में कई पदकों से सम्मानित हो चुके हैं। उन्हें 2004 में पुलिस आंतरिक सुरक्षा सेवा पदक और सराहनीय सेवा के लिए 2009 में पुलिस पदक मिला था। इसके अलावा 2016 में विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से नवाजा गया था।