बैठक में जम्मू-कश्मीर, पंजाब, उत्तराखंड, राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्य सहित सीमावर्ती राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस अधीक्षक शामिल हुए थे।
माना जा रहा है कि इस बैठक में अवैध घुसपैठ पर लगाम लगाने के प्लान पर सबसे अधिक चर्चा हुई। देश में अवैध घुसपैठिया के नेटवर्क को खत्म करने पर अमित शाह लगातार बोलते रहे हैं। ऐसे में यह मीटिंग अहम मानी जा रही थी , क्योंकि देश को नक्समु्क्त बनाने के बाद मोदी सरकार अब अवैध घुसपैठ पर एक्शन की तैयारी में है।
गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में घुसपैठ, अवैध आप्रवासन, आबादी में बदलाव, बॉर्डर सिक्योरिटी, ड्रोन से खतरा और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। यह बैठक अवैध आप्रवासन के खिलाफ केंद्र के तेज अभियान के बीच अहम है। केंद्र ने इसे बांग्लादेश के साथ अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर स्थित जिलों की आबादी की बनावट को बदलने की एक संगठित कोशिश का हिस्सा बताया है। बैठक में सुरक्षा से जुड़ी नई चिंताओं को उजागर कर और इन चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के उपायों पर विचार-विमर्श किया गया।
सीमांत जिला पुलिस अधीक्षक सम्मेलन-2026 को संबोधित करते हुये अमित शाह ने कहा कि इस सम्मेलन से समग्र सीमा सुरक्षा के दृष्टिकोण को संस्थागत रूप मिला है और आने वाले समय में तटीय सीमा सुरक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में भी हम समग्रता से आगे बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में सीमाओं की सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा, निराकरण की चिंता और इस दिशा में उपयुक्त उपायों को नीतिगत स्वरूप देने का काम होगा। मोदी सरकार, संबद्ध सीमा रक्षक बल, राज्य और जिला प्रशासन, भारत सरकार के संबंधित हितधारक और स्थानीय नागरिकों के परस्पर जुड़ाव के साथ एक मजबूत चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड का निर्माण कर रही है।
केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने कहा, ‘स्मार्ट बॉर्डर की कल्पना पर आधारित भारत की बॉर्डर सुरक्षा व्यवस्था आने वाले समय में विश्व में सबसे आधुनिक होगी। सुरक्षित सीमा, समृद्ध सीमांत और सजग समाज के साथ ही देश सुरक्षित हो सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश को जम्मू-कश्मीर और नॉर्थईस्ट में आतंकवाद और नक्सलवाद से निजात मिली है, जो हमारी साझी सफलता का सूचक है। आने वाले तीन सालों में हम नारकोटिक्स की समस्या को गंभीर क्षति पहुंचाकर इस पर विजय प्राप्त करेंगे। ’
उन्होंने कहा, ‘देश को घुसपैठियामुक्त बनाने और घुसपैठ हो ही न सके, इसके लिए एक मजबूत तंत्र का निर्माण कर रहे हैं। पहले समस्याएं स्थायी और समाधान अस्थायी थे, मोदी सरकार में समस्याओं की जड़ पर प्रहार कर समाधानों को स्थायी बनाया जा रहा है. मोदी सरकार ने बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर में 400 प्रतिशत वृद्धि कर वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ इसे आगे बढ़ाया है।’
अमित शाह ने कहा, ‘पीएम मोदी ने वायब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम के तहत देश के अंतिम गांव को देश का प्रथम गांव कहा है. इसके तहत पलायन रोकने, रोजगार बढ़ाने और सरकारी योजनाओं का शत प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है. मोदी ने जनसांख्यिकी परिवर्तन का अध्य्यन करने, उसमें असामान्य कारणों से हो रही वृद्धि को चिह्नित करने और भविष्य में इसे रोकने के उपाय सुझाने के लिए डेमोग्राफी मिशन की शुरूआत की है।‘
केंद्रीय गृह मंत्री ने सीमांत क्षेत्रों में असामान्य कारणों से जनसांख्यिकी में हो रहे बदलाव की सूचना जल्द से जल्द नीचे से उच्चतम स्तर तक पहुंचाने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा, ‘मोदी सरकार 31,000 करोड़ रुपये की लागत से 1,610 किलोमीटर लंबे म्यांमार बॉर्डर पर बाड़बंदी कर रही है।’
उन्होंने कहा, ‘प्रॉक्सी वार, घुसपैठ, कट्टरपंथ का प्रसार, नारकोटिक्स, तस्करी, ड्रोन, साइबर अपराध, संगठित अपराध और जनसांख्यिकीय परिवर्तन रोकना, सीमा को रहने लायक बनाना और वहां से पलायन रोकना और सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारे उद्देश्य है।’
अमित शाह लगातार कहते रहे हैं कि हम एक ऐसा मजबूत सुरक्षा तंत्र बना रहे हैं। जिससे देश को घुसपैठियां मुक्त करने के साथ ही घुसपैठ ही नहीं हो सकेगी। गुरुवार को हुई बैठक में भी उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि जिस तरह से देश को जम्मू कश्मीर और नॉर्थ-ईस्ट में आतंकवाद और नक्सलवाद से निजात मिली है। घुसपैठ को रोकने के साथ ही आने वाले 3 सालों में सरकार नारकोटिक्स की समस्या पर भी विजय प्राप्त करेगी।
गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दिमाग में सीमांत (बॉर्डर) जिलों की सुरक्षा और डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी) को संतुलित रखने की सबसे बड़ी प्राथमिकता चल रही है। उनके मुख्य विजन और रणनीतियों में शामिल है। वे सीमावर्ती जिलों में हो रहे असामान्य जनसंख्या परिवर्तन और अवैध घुसपैठ के मूल कारणों का पता लगाने और सुधार के लिए एक विशेष मिशन की शुरुआत कर चुके हैं। ऐसे में इस बैठक के बाद सीमांत जिलों में होने वाली घटनाओं पर सबकी निगाहें रहेंगीं।