Saturday, August 29, 2009

आडवाणी ने जिन्ना के साथ गुप्त बैठक की, जैक्सन ने समां बांधा...

कल देर रात आडवाणी के घर जब कुछ भारतीय झंझट पार्टी (भाझपा) के नेताओं की बैठक समाप्त हुई तो इसके तुरंत बाद पूर्व उप प्रधानमंत्री पडो़सी मुल्क के संस्थापक जिन्ना साब के साथ चुपके से नैनो रथ पर सवार होकर मेरे घर आ धमके। मैं रात का खाना शिप्रा मॉल के पंजाबी ढाबे में खाकर लौटा था, जहां हाल ही एक बलुच रेस्तरां भी खुला है। (भला हो मेरी दीदी और जीजाजी का कि उन्होंने उस रेस्तरां में नहीं खिलाया, वरना कुछ तालिबानी भी हमारे घर आ धमकते।)
जब घर पहुंचा तो देखा बाहर वाले कमरे में लाइट जल रही है और दो व्यक्ति फ्रस्टाएल मूड में बैठा हुआ है और दूसरी ओर चटाई पर माइकल जैक्सन गिटार पर राग छेड़ रहे हैं।

आडवाणी काफी गुस्से में थे और जिन्ना बेहद शांत लेकिन अंदर से व्यथित दिख रहे थे। आडवाणी ने कहा- '' जिन्ना साब आपका जिन्न हमें डिस्ट्रब कर रखा है। अरे आप लोगों ने क्या एक मुल्क बनाया और सिर-फुटोव्वल मेरी पार्टी में मची है। मैं तंग आ गया हूं। कल हमारी मातृ संगठन के मुखिया भागवत ने प्रेस कांफ्रेंस कर हमें बता दिया कि वह भी राजनीति का व्याकरण समझ गए हैं इसी वजह से नाप-तौल कर प्रेस वालों के साथ बातचीत की।''

जिन्ना की मरघट चुप्पी को जैक्सन ने तोड़ा। उसने कहा, ''अरे मियां क्या चुपचाप बैठो है, देखो आयरन मैन (आडवाणी की ओर गिटार दिखाते हुए) तब से बोले जा रहा है, कुछ तुम भी बोलो।'' जिन्ना ने जैक्सन की ओर आंख दिखाते हुए कहा- ''तुम चुप रहो, लाओ कुछ गोलियां दो ताकि लालजी से गुफ्तगू करने के बाद उसे खाकर फिर से कब्र में आराम से सो जाऊं, लाओ जल्दी लाओ.।''

जैक्सन ने उन्हें बेहोशी की दो बहुत ताक़तवर दवाएँ, प्रोपोफ़ोल और लौरज़ेपाम दी। उल्लेखनीय है कि इसी दवा को खाने के बाद जैक्सन ने अपने लाखों-करोड़ो प्रशंसकों को निराश कर दिया और अपनी जायदाद को लेकर मां- पुतोहू में कुछ दिन के लिए ही सही लेकिन झगड़ा लगा दिया।

जैक्सन की बात मानते हुए आडवाणी की ओर मुखातिब होने से पहले जिन्ना ने एक बार ऊपर देखा और फिर बोले- ''अरे लालजी, आप तो सिंध से हैं न, ऐसा करिए चलिए हमारे साथ और हां वाजपेयी कहां है आजकल । उसे भी कहिए बस, से हमारे साथ चलें। आपकी जरूरत अब इस मुल्क को नहीं है। पाकिस्तान में आपकी काफी मांग है। दरअसल जरदारी आजकल कुछ ज्यादा बकर-बकर करने लगिस है। आप वहां चलिए और राजनीति कीजिए और आज रात (28 अगस्त) जो सब भागवत से मिलकर आपसे मिलने आए थे, उसे भी साथ ले लें, हां जेटली का तो वहां काफी काम है। क्रिकेट-विकेट भी संभाल लेगा। वैसे यब बताइए कि कल वैंकेया, जेटली, अनंत और सुषमा आपसे मिलेन क्यों आई थी....''

जिन्ना के इस सवाल पर लालजी ने चुप्पी साध ली..।

गिटार के साथ धुन तैयार कर रहा अपना जैक्सन इन लोगों की बातचीत से बेहद ट्राबुल में आ गया था। उससे रहा नहीं गया, और बेहद आक्रमक अंदाज में कमर लचकाते हुए दोनों नेताओं से कहा-
''अरे अब चलिए भी, जिसका घर है वह कहीं आ जाएगा तो बात बाहर तक पहुंच जाएगी कि भाझपा जिन्ना के रास्ते पर चलने लगी है। अभी भागवत दि्ल्ली में ही हैं, आडवाणी को नेता ऑपोजिशन से भी हाथ धोना पड़ जाएगा और जिन्ना अंकल आप चुप ही रहिए, देश को तो चला नहीं पाए और अब आडवाणी की टीम को इस्लामाबाद में स्थापित कर कब्र में गालिब को पढ़ना चाहते हैं। ऐसा कीजिए आप सभी मेरे साथ लास एजेंलिस चलिए वहां के फॉरेस्ट लॉन कब्रगाह में एक पार्टी करते हैं, मजा आ जाएगा....''

नोट- (यह गुप्त बैठक शुक्रवार मिडनाइट 12 बजे से 1.30 बजे तक चली। यह ब्रेकिंग न्यूज को ब्रेक नहीं करने के लिए आडवाणी, जिन्ना और जैक्सन ने एक पर्ची कमरे में छोड़ दी थी। इस आग्रह के साथ कि यह दो मुल्कों के सम्मान और एक महान संगीतज्ञ की प्रतिष्ठा का सवाल है। )

7 comments:

Ranjeet said...

क्या लिखे हो भाई , मजा आ गया !!!!

विनय ‘नज़र’ said...

ताल ठोंक दी, ता थई आ थई!
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तख़लीक़-ए-नज़र

Shailesh Kumar said...

Bahut sahi farmaya hai aapne. Padhte waqt usme kho sa gaya.
Vartman me chal rahe ghatnakram ko badi bakhubi se halke andaz me bayan kar diya hai aapne.
Par uske andar badi gambhirta chipi hai.
Expecting more such pieces from you.

VIJAY THAKUR said...

क्या अंदाज़ है जनाब...नए तेवर में पढ़ा अभी आपको...सच में मजा आ गया.

अविनाश वाचस्पति said...

यह अनुभव तो
बहुत अच्‍छा रहा है।
आप अपनी कलम
और मानस को
इस ओर भी
नियमित दौड़ाते रहें।

अर्शिया said...

Kya baat hai.
( Treasurer-S. T. )

विनीत कुमार said...

हमें तो पढञकर यही लगा कि आडवाणी को जिन्ना इसलिए पाकिस्तान ले जाना चाहते थे कि वो भी पुराने ढर्रे पर की पॉलिटिक्स से उकता गए हैं. वो अब अखंड भारतवाली पॉलिटिक्स में इन्टरेस्ट लेने लग गए हैं। इसी को कहते है दूरदर्शिता,तुम मेरी पीठ दिल्ली में सहलाओ,हम तुम्हारी पीठ लाहौर आने पर खुजलाएंगे। परस्पर विरोधी देश में बेहतर छवि बनने से ज्यादा दिनों तक टिकाउ बने रहने सी संभावना बढञ जाती है।..सही है भइया,हम तो यही कहेंगे कि इ पोस्ट के एगो पिरिंटआउट निकालकर फॉरन मिनिस्टरी में फौरन जमा करा दो,सैंकड़ों आदमी को मातापच्ची से राहत मिल जाएगी।..