(अगर आपको लगे कि आपने दफ्तर की तमाम मजबूरियों को जीते हुए प्रमोशन, वेतन और मकान सब अर्जित कर लिया है और उनको भी सेट कर दिया है जो आपको पसंद नहीं थे, तो ऐसे कामयाब लोगों को पाश की यह कविता जरूर पढ़नी चाहिए ताकि अकेले में अहसास हो सके कि वाकई आपके सपने पूरे हो गए ...या फिर.....)
सबसे ख़तरनाक होता है
मुर्दा शांति से भर जाना
न होना तड़प का सब सहन कर जाना
घर से निकलना काम पर और
काम से लौटकर घर आना
सबसे ख़तरनाक होता है
हमारे सपनों का मर जाना---
5 comments:
बहुत ही अच्छी अभिव्यक्ति!
sapane bhi kai baar tut jaate hai .......bahut hi badhiya
सही बात।
अचछी अभिवयक्ति। उन्मन जी कहते हैं कि-
अपने सारे खोये मैंने सपने तुम न खोना
होना जो था हुआ आजतक आगे अब क्या होना
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com
पाश की एक और कविता ' हम लडेंगे साथी उदास मौसम के खिलाफ " भी दीजिये उम्दा कविता है
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