Sunday, January 18, 2009

सरकार कोसी याद है या भूल गये

''हम मारे छी मुक्का कपाड़ मे , हमर किस्मत फुटल कोसी धार मे''
(NDTV पर कल रात स्पेशल रिपोर्ट मे इन पंक्तिओं को सुना था )

देश के हुक्मरान इस समय कई चीजों में उलझे हैं लेकिन कोसी के कहर को जैसे भूलते जा रहे हैं। मत भूलो सरकार॥ सराय के राकेश कुमार सिंह ने बाढ़ मे उजड़े इलाकों का दौरा किया था। उन्होंने जो भी बताया वह एक अलग ही रिपोर्ट है। शायद वे जल्द ही अपनी रिपोर्ट को साझा करेंगे। हालाँकि ब्लॉग हफ्तावार पर वे इस सम्बन्ध कुछ फोटो पोस्ट कर चुके हैं .......



बिहार मे बाढ़ से २० लाख विस्थापितों की आवाज क्या आप भूल गये हैं ? 18 अगस्त २००८ को कोसी नदी कयामत बन कर उत्तर बिहार के इलाकों में टूट पड़ी थी ।तबाही का ये मंजर इसलिए भयावह था क्योंकि कोसी नदी ने अपने प्रवाह का रास्ता बदला था । लोगों को डर इस बात की थी कि बिहार के नक्शे से सुपौल जिले का नाम मिट जाएगा और मधेपुरा जिले का भी रूप भी बदल जाएगा।


राज्य के आठ जिलों के 993 गांव की लाखों आबादी बाढ़ की चपेट में आ गयी थी, जो आज भी अपने भाग्य को कोश रहे हैं । जनाब , नदियों के बहाव का रास्ता बदलना किसी कयामत से कम नहीं होता। इसका सीधा-सा मतलब यह है कि 100 किलोमीटर के पूरे इलाके का जलमग्न हो जाना।


चार महीने गुज़र चुके हैं लेकिन हालत ज्यों के त्यों बने हुए हैं। पूर्णिया से मीरगंज जाते समय आप आज भी नाव चलते देख सकते हैं। हालत भयावह है। बिहार ने पहली बार मेगा कैंप का नाम सुना, जो विस्थापितों का आज भी ठिकाना बना हुआ है। सरकार इन मेगा कैम्पों को बनाकर जैसे निश्चिंत हो गयी है, लेकिन वास्तव मे ऐसा कुछ भी नही है।


मधेपुरा, सुपौल, अररिया, पूर्णिया जिले सबसे अधिक प्रभावित हुआ। यहाँ के ९९३ गांव जलमग्न हो गये थे .... इन इलाकों मे सरकारी डॉक्टर नही आपको गैर सरकारी संगठनों के डॉक्टर मिलेंगे, जो बिहार सरकार के सुशासन के दावों का पोल खोलती है।


कल रात फारबिसगंज के बथनाहा मे रह रहे दोस्त अमित से बात हुई। अमित ने कहा खेती चोपट है। इस बार क्या होगा पता नही...... । आप को पता है, बाढ़ मे मारे गये उन लोगों के परिजनों को मुआवजा राशी नही मिल रही है जिनके पास पोस्ट- मार्टम रिपोर्ट नही है......... ये भी है सच्चाई । जरा सोचियेगा।
फोटो साभार - AP

3 comments:

अविनाश वाचस्पति said...

कोस भर कोश
कोशी का कोश
प्रकट है रोष


दावे तो होते
तोड़ने के लिए
जोड़ते हैं ये
तोड़ते हुए।

रिपोर्ट जाएगी
रपट
लगेगी हर बार
चपत।

कोश संजोना होगा
हर बार रोना होगा।

महेंद्र मिश्रा said...

हमारे देश में हादसे होना फ़िर उसके बाद भुला देना एक तरह का रिवाज सा बन गया है .

PD said...

बस ६-७ महीने और.. फिर कोशी का रुद्र रूप हमारे सामने आएगा..