Wednesday, December 03, 2008

सूना-सूना जग लगे....शहर के उजाले में पसरा अंधेरा....



अभी-अभी शिप्रा मॉल से आया हूं। सच कहूं, मुंबई हमलों के बाद पहली दफे किसी मॉल में जाना हुआ। नवंबर 13 और 14 को भी गया था, लेकिन आज की शाम बेहद उदासी भरी रही। अक्सर अपने दोस्तों के साथ मॉल में सच कहूं- तो आवारागर्दी करता रहा हूं, कभी यहां तो कभी वहां, निकलते ही किसी बार में हम बैठ जाया करते थे.....लेकिन आज ऐसा कुछ भी करने का जी नहीं कर रहा है।

दरअसल, आज सुबह ऑफिस में एनडीटीवी देख रहा था। परिमल कुमार की रिपोर्ट देखा, जिसमें कहा जा रहा था कि दिल्ली में लोग कैसे मॉल और अन्य शापिंग सेंटर से दूरी बनाने लगे हैं। सुबह की रिपोर्ट के बाद मन बनाया था कि आज किसी मॉल में जाऊंगा।

शाम लगभग साढ़े छह बजे के करीब हम अपने दोस्तों के साथ शिप्रा मॉल में इधर-उधर घूम रहे थे। भीड़ तो नहीं के बराबर नजर आई। सच कहूं तो मैं अक्सर मॉल के कुछ स्थानों पर खुद को असहज महसूस करता हूं, मसलन स्वचालित सीढ़ीयों और फिसलन भरे फर्श पर। लेकिन आज मैं बेहद शांत और सहज महसूस कर रहा था। सोच रहा था क्या ऐसा ही मुंबई में पिछले बुधवार को लोग महसूस कर रहे होंगे, जब आतंकवादी अंधाधुंध गोलियां बरसा रहे थे।

रवीश के कस्बे पे आज उनकी कविता पढ़ने और बुधवार रात के बाद लगातार मंबई हमलों की खबरों से घिरे रहने के बाद से मन में यही सवाल उठ रहे थे, जैसा रवीश ने कहा है-


मैं आराम से पड़ा रहूंगा कहीं पर

किसी स्टेशन या किसी मॉल के बीचों बीच

ख़ून से लथपथ, आंखें बाहर निकलीं होंगी

पर्स में अपनों की तस्वीरों के नीचे दोस्तों के पते

मिलेंगे और सरकारी नोट एटीएम की दो चार रसीदें होंगी..........


अविनाश की पोस्ट भी याद आ रही है, जिसमें उन्होंने अंत में लिखा है-

पिछले तीन दिनों तक मुंबई में जो हुआ - हम एक बार भी नहीं रोये थे। बल्कि कई बार किसी न किसी बात पर ठठा कर हंसे ....................
मॉल से आने के बाद भावुक हो गया हूं। हमने बुधवार की रात और आतंकी तांडव में अपने सगे लगभग 200 को गंवाया है। आज देश भर में लोग उन्हीं की यादों में मोमबत्तियां जला रहे हैं। मयूर विहार फेज-1 में अपने दोस्त के यहां हूं, यहां भी कुछ लोग मोमबत्तियां हाथों में लिए दिखे। अभी-अभी बाबूजी का फोन आया, उन्होंने बताया कि हमारे शहर पूर्णिया में भी मोहल्ले में लोग मोमबत्तियां लिए दिख रहे हैं। मानो बाबूजी लाइव रिपोर्टिंग कर रहे थे। उनकी आवाज में अजीब लग रही थी मुझे। उन्होंने कहा कि चार मोमबत्तियां उन्होंने बरामदे पर जला कर रखी है, वे अकेले

क्या समवेत आवाजों को हमारे हुक्मरान सुन पा रहे हैं, सोनिया गांधी ने उड़ी (जम्मू कश्मीर) में आज चुनावी सभा में कहा था- आतंकवाद का मुंहतोड़ जवाब देगा भारत.....पता नहीं वह मुंहतोड़ किस मुख से कह रही होंगी और कहते वक्त क्या उन्हें आत्मग्लानि का अहसास हुआ होगा......

ढेर सवाल हैं, फिर माफी मांगता हूं,,,,,मैं विषयांतर होते जा रहा हूं।

3 comments:

Anonymous said...

भावुक मत हो..गुरु,,,कुछ करने का वक्त आया है....आतंकवादी तो अपने मंसूबे में सफल हुए. उसी का नजारा आपने मॉल में देखा

संदीप पाण्डेय said...
This comment has been removed by a blog administrator.
संदीप पाण्डेय said...

गिरीन्द्र भाई आप ने बढ़िया किया जो मॉल घूम आए, क्या होगा झूठा शोक मना कर.. जब हमारा कोई मरा ही नही वहां. आशा है आप भी मॉल पे आतंकवाद का असर देखने नही मन बहलाव करने गए होंगे और होना भी यही चाहिए. मुझे तो अभी से टेंशन हो रही है की नए साल का जश्न भी कहीं भेंट न चढ़ जाए इस आतंकवाद की.

अमिताभ और आमिर भी ब्लॉग पर लड़ रहे हैं आतंकवाद से उनकी पीडा समझ में आती है उनका उन्होंने पैसे लिए होंगे नए साल पर कहीं नाचने के लिए. अब इस घटना के बाद इधर कुआँ उधर खाई जैसी हालत है, समझ नही आ रहा करें तो क्या???

आप भी लड़िये और मैं भी लडूंगा इससे ज्यादा हमारे बस में है ही क्या????? ज्यादा आत्मग्लानि हो रही हो तो कहीं मोमबत्ती वगैरह जला आइये. आत्मा को तसल्ली मिलेगी और अपराधबोध भी कटेगा, लेकिन हाँ इसके लिए ऑफिस से छुट्टी लेनी होगी गुरु........