Saturday, November 29, 2008

गुस्से में मुकेश


स्कूली दिनों में हमारे स्कूल का एक मेधावी छात्र "मुकेश से आज गूगल चैट पर बात हो रही है, वह मुंबई में है और बेहद गुस्से में भी है।
उसने 26-27-28 की मुंबई देखी और आज सुबह की भी। बेहद गुस्से और भावुक भी है। उसने अभी-अभी अपनी बात लिख भेजी है। वह Sydenham Inst. of management studies का छात्र है।

बुधवार की काली रात, हम Govt College Hostel, Churchgate के हॉस्टल में पढाई कर रहे थे। दरअसल, 27 तारीख को हमारी परीक्षा होने वाली थी, तभी मेरे दोस्तों न बताया कि बाहर मैरिन ड्राइव और कोलाबा में कुछ समस्या आ गई है, मानो गैंगवार हो रहा है। हमने उस समय Olympiad रेस्तरां से भोजन का आर्डर दिया था।

हमें जैसे सूचना मिली, हम सहम गए। हमें समझ में आ गया कि यह आतंकवादी हमला है। मेरे कुछ दोस्त जो crawford बाजार इलाके में रहते हैं, उनकी हालत और भी गंभीर थी। वे घरों में दुबके थे। उनके घर के नीचे सेना तैनात थी। दरअसल उस समय आतंकवादी सीएसीट में फायरिंग कर रहे थे। कुछ आतंकवाद पुलिस की जिप्सी लेकर मेट्रो टॉकिज की तरफ भाग गए और जबरदस्त फायरिंग शुरू हो गई। ये सबकुछ हमारे आस-पास हो रहा था।

हम सभी डरे थे, कल हमलोगों ने जीटी अस्पताल में रक्त दान किया। मैं बेहद भावुक हो गया हूं और गुस्से में भी हं। मैं रंग दे बसंती का एक किरदार निभाना चाहता हूं, जंग लगे सिस्टम को बदलने के लिए।
फोटो- बीबीसी से साभार

3 comments:

We hate Pakistan said...

जिहाद के नाम पर ये फैलाता है जूनून

मासूमों का खून बहाकर पाक को सुकून


आप भी, अपना आक्रोश व्यक्त करे

http://wehatepakistan.blogspot.com/

dehati said...

pata nahi ye jehadi kyon hamesha hi nirdos ki hatyaen karte aa rahe hain.sach kahiye to ye zehad ke nam par ik kala dhaaba hi hai. aatakbadiyon ka koi dharm nahi hota.

आलोक सिंह "साहिल" said...

GIRINDRA JI,aapki bhawnaaon se awagat hua,hamne to bahut door se is ghatna ko sun/padh kar mahsus kiya par aapne bahut hi karib se mahsus kiya.
bhawnaaon par niyantran rakhiye aaj hame rang de basanti ki nahin,
MADHUR BHANDARKAR KE "SATTA" KI HAI.
ALOK SINGH "SAHIL"