Sunday, August 10, 2008

मैथिली को ऑनलाइन बढ़ावा दे रही हैं महिलाएं


ब्लॉग के जरिए जिस प्रकार हिंदी को ऑनलाइन बढ़ावा मिल रहा है, ठीक उसी तेजी से कई आंचलिक भाषाएं भी ब्लॉग जगत में कदम बढ़ा रही हैं। इसी प्रयास में बिहार की राजधानी पटना में कुछ महिलाएं मैथिली को ऑनलाइन बढ़ावा देने में जुटी हुई हैं। यहां की कुछ महिलाएं मैथिली का पहला ई-समाचार पत्र ''समाद'' ऑनलाइन प्रकाशित कर रही हैं।

वर्डप्रेस डॉट कॉम के सहयोग से 'समाद' को निकाला जा रहा है। इस ऑनलाइन समाचार पत्र को ब्लॉग की शक्ल में निकालकर ये महिलाएं एक अलग प्रयोग कर रही हैं। खास बात यह है कि इस ऑनलाइन समाचार पत्र को निकालने वाली छह महिलाओं का पत्रकारिता जगत से कोई संबंध नहीं है।
यहां पर पाठकों के लिए बिहार से जुड़ी तमाम खबरें मौजूद हैं। 'समाद' का मैथिली में अर्थ होता है संदेश। इस खास तरह के समाचार पत्र रूपी ब्लॉग की संचालक महिलाओं का कहना है कि इसके जरिए वे बिहार की एक अलग छवि लोगों तक पहुंचाने का प्रयास कर रही हैं।
ऐसी कई खबरें, जिसे समाचार पत्र या चैनलों पर नहीं देखा जा सकता है, उसे आप 'समाद' में पढ़ सकते हैं। मसलन, बिहार के मधुबनी जिले के ककरौल गांव में पांच इंटरनेट कैफे किस प्रकार यहां के युवाओं में प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में क्रांति लाने का प्रयास कर रहे है, इस संबंध में यहां एक खास रिपोर्ट है ।
विश्व में मैथिली भाषी लोगों की संख्या लगभग तीन करोड़ है। हालांकि, 'समाद' के अलावा भी मैथिली में कई ब्लॉग सक्रिय हैं, जहां साहित्य संबंधी ढेर सारी पोस्ट पढ़ने को मिल जाएगी, लेकिन समाद उन ब्लॉगों से भिन्न है। यहां ब्लॉग को समाचार पत्र के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। 'बेटा' संस्करण में होने के कारण यहां सामग्रियों को खास तरीके से पेश करने में सुविधा होती है।
'समाद' को कुमुद सिंह, प्रीतिलता मलिक, ममता शंकर, सुषमा और छवि नाम की महिलाएं चला रही हैं। इस ऑनलाइन समाचार पत्र को प्रकाशित करने में इन्हें 1100 रुपये प्रति माह खर्च करने पड़ते हैं।

3 comments:

chetna said...

grindra jee
neek samachar. mithila ke beti apne ilaka mein rahi ke atek kaj kari rahal chhathi, se garvak vishay achi. panch versh pahine hum bihar chhorlohun. takhne media mein hum beti sab apan upashthiti neek darz ka lene rahi. aab dinodin pragati bha rahal achi.
chetna

गिरीन्द्र नाथ झा said...

chetna,
निक लागल, लेकिन अहाँ का ब्लॉग पर गेलो मुदा पोस्ट नदारद, से क्या ....

Girindra

Gajendra Thakur said...

गिरीन्द्रजी,
एकटा मैथिली दैनिक "मैथिली समाद"क निकलबाक चरचा सुनने चलहुँ, साहित्य अकादमी सभागारमे भेल काव्यगोष्ठीमे। अगस्त 2008 मे निकलए बला चल। विदित जी सैम्पल सेहो देखेने चलाह, आऽ सम्पादक ताराकान्त झा जीसँ सभकेँ इन्ट्रोड्यूस सेहो करओने छलाह। ओकर की भेल से पता कए कहब। हमहूँ पता कए रहल छी, मुदा भाँज नहि लागि रहल अछि।
वर्डप्रेसक समाद हम निरन्तर पढैत रहैत छलहुँ, पी.डी.एफ. डाउनलोड कए। नीक तँ बड्ड अछि मुदा बड़--बड़ दिनपर अबैत अछि। टीमकेँ हमर शुभकामना पठा देबन्हि।

গজেন্দ্র ঠাকুব