Saturday, February 17, 2007

देखें और जसराज के रस में डूबकी लगाऐं...

जसराज , नाम हीं काफी है..हर संगीत प्रेमी उनके गीत-भजन का दिवाना होता है. जब भी दिल्ली आते हैं तो उन्हे सुनने का मौका मैं खोज निकालता हूं.
एक संगीत कार्यक्रम में जब १६ फरवरी को उनका दिल्ली आना हुआ तो मैं निकल पडा,उन्हे सुनने को. महाशिवरात्रि के पावन मौके में उनके शिव भजन को लोग कैसे न सुने ! मध्य रात्रि तक पं.जी का कार्यक्रम चलता रहा...
हम सब ध्यानमग्न होकर सुनते रहे.
अपने जय घोष -जय हो ! के स्वर से हर किसी को अपनी ओर खिंचने वाले जसराज के साथ तकरीबन एक घंटे ग्रीन रूम में बात करने का मौका मिला. बेहद संजीदगी से बात करने वाले जसराज बेहद नट्खट बच्चे की तरह बतियाते रहे. बातों के साथ्-साथ उनका रियाज़ भी जारी था. मनमोहक अंदाज में हाथों का घुमाना हो या फिर आंखों ही आखों बातों को कहना..ये सब जसराज जी के संग मैं महसूस करता रहा.
बीच-बीच में एक व्यक्ति उनका नब्ज भी जांच करता रहा.
समय कैसे गुजरे पता न चला, जसराज जी बोले-" अब चलो, स्टेज पे देखना.." तभी एकाएक बच्चे की तरह कह उठे-" मुझे जोर से भूख लगी है..पहले कुछ खाउंगा.."
ऐसे हैं..सहज अपने जसराज.
इस बीच मैंने उनके कुछ फोटो लिए...
देखें और जसराज के रस में डूबकी लगाऐं...



5 comments:

Udan Tashtari said...

पंडित जी और उनके संगीत की बात ही निराली है. बहुत अच्छा यहाँ देखकर. आपका आभार हम तक यह तस्वीरें लाने के लिये. बातचीत का विस्तार दें तो और आनन्द आयेगा.

विजय said...

संगीत का रस और पंडित जसराज एक दुसरे के पर्याय हैं... काश.. वह दृश्य देखने के लिए आपके साथ आपकी आंखों की जगह मैं भी होता..। वैसे अनमोल तस्वीरें देकर आपने बहुत हद तक ये कमी पूरी कर दी है।

miredmirage said...

धन्यवाद गिरीन्द्र जी ।
घुघूती बासूती
ghughutibasuti.blogspot.com

manya said...

achchha laga Pt.Jasraaj ji ke baare me jaanana .. waise sachmuch unka naam hi kaafi.. unhe jyada to nahiM suna hai.. par fir bhi jitna suna hai.. bahut pasand aaya hai..dhanywaad

मोहिन्दर कुमार said...

इस प्रस्तुति के लिये धन्यवाद, काफी ज्ञानवर्धक है
कृप्या http://dilkadarpan.blogspot.com पर पधार कर अपनी उपस्थिति दर्ज करें

धन्यवाद