मुझे आदमी का सड़क पार करना हमेशा अच्छा लगता है क्योंकि इस तरह एक उम्मीद - सी होती है कि दुनिया जो इस तरफ है शायद उससे कुछ बेहतर हो सड़क के उस तरफ। -केदारनाथ सिंह
Friday, June 12, 2026
एलएलसी निशांत कुमार 12 वीं पास!
एक समय बिहार में लालू यादव के बेटे तेज प्रताप और तेजस्वी की शिक्षा को सियासी मुद्दा बनाकर मीडिया में खूब परोसा जाता था। दरअसल, तेज प्रताप कॉलेज ड्रॉप आउट हैं और तेजस्वी यादव स्कूल ड्रॉप आउट। मतलब, उन्होंने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी। अब समय का फेर देखिए, बिहार के भूतपूर्व मुख्यमंत्री और सुशासन बाबू के नाम से प्रसिद्ध नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार को लेकर 12 वीं पास का हल्ला जोड़ पकड़े हुए है। पिछले कुछ दिनों से यह मामला बिहार की हेडलाइन बनकर लोगों की जुबान पर चढ़ा हुआ है।
कुछ महीने पहले तक जेडीयू के कई वरिष्ठ नेता निशांत को इंजीनियर बताते नहीं थकते थे। और तो और, इस बात पर न तो कभी नीतीश कुमार ने और ना ही निशांत ने किसी तरह की टिप्पणी दी। दरअसल ये बात तब सामने आई जब बिहार विधान परिषद के नॉमिनेशन फॉर्म में दर्ज किया गया कि निशांत सिर्फ 12वीं पास हैं।
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, 'जिस नीतीश कुमार के बेटे को लोग इंजीनियर बताते नहीं थकते थे, वह 12वीं निकला। चुनावी हलफनामें में स्वयं बताया कि वह ग्रेजुएट नहीं है। ताउम्र परिवारवाद के विरोध की नौटंकी करने वाले बेईमान लोगों की सारी परतें खुलेंगी। इंतजार कीजिए।'
इस बीच अब नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। गुरुवार (11 जून, 2026) को मीडिया से बातचीत में आरजेडी नेता ने इस पर बयान दिया। निशांत कुमार को लेकर तेजस्वी यादव ने कहा, "बिहार के शिक्षा मंत्री पर पूरा विश्वास है कि निशांत जी को इंजीनियर बनाने का काम करें. एक प्रोफेसर बन गए... एक इंजीनियर बन जाएंगे."
अब भले निशांत कुमार एलएलसी बन चुके हैं लेकिन राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार के बेटे और बिहार सरकार में स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर निशांत कुमार की शैक्षणिक योग्यता पर सियासत जारी है। उनकी तथाकथित बी.टेक की डिग्री को लेकर सबसे पहले आरजेडी ने हल्ला बोल किया था।
हालांकि अबतक निशांत कुमार ने इस मुद्दे पर कुछ नहीं बोला है। समाचार चैनलों के मुताबिक बुधवार (10 जून, 2026) को निशांत कुमार जब मीडिया के सामने आए तो पत्रकारों ने बी.टेक पर सवाल किया था पत्रकार पूछने लगे कि कुछ तो इस पर बोल दीजिए लेकिन निशांत कुमार सवालों को सुनकर चुप रहे। उन्होंने किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं दी थी
बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए दाखिल हलफनामे ने निशांत की डिग्री की सच्चाई सबके सामने खोलकर रख दी है।अब तक उन्हें इंजीनियर माना जाता रहा, लेकिन चुनावी दस्तावेजों से साफ हो गया कि उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी ही नहीं की थी।
हलफनामे के अनुसार निशांत कुमार ने 1998 में पटना साइंस कॉलेज से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (BIT Mesra) में बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कंप्यूटर साइंस) में दाखिला लिया।
हालांकि, 8 सेमेस्टर के कोर्स में वे केवल 5 सेमेस्टर तक ही पढ़ाई कर सके और वर्ष 2001 में उनकी पढ़ाई अधूरी रह गई।
यानी लंबे समय से उन्हें “इंजीनियर” बताने की जो धारणा बनी हुई थी, वह अब गलत साबित हुई है। चुनावी हलफनामे में उनकी शैक्षणिक योग्यता ने इस भ्रम को पूरी तरह खत्म कर दिया।
विपक्ष का कहना है कि यह मामला केवल शैक्षणिक योग्यता का नहीं, बल्कि उस राजनीतिक छवि का भी है जो वर्षों से निशांत कुमार के बारे में बनाई गई। राजद का दावा है कि कई जदयू नेताओं ने सार्वजनिक रूप से उन्हें इंजीनियर बताया, जबकि इस पर कभी सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया।
गौरतलब है कि लालू प्रसाद, नीतीश कुमार और रामविलास पासवान जैसे बिहार के शीर्ष दिग्गज नेताओं ने शिक्षा और सुधारों की बात तो की, लेकिन उनके अपने ही घरों में इसका असर नहीं दिखा। तेजस्वी और चिराग के बाद अब विपक्ष के निशाने पर नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार हैं, जिन्हें '12वीं पास' बताकर घेरा जा रहा है। हालांकि इस मुद्दे पर सबकी स्थिति एक जैसी ही है, इसे बिहार का दुर्भाग्य ही माना जाएगा!
पिछले महीने सम्राट चौधरी सरकार के विस्तार के दौरान मंत्री पद की शपथ लेने वाले निशांत को स्वास्थ्य मंत्रालय का महत्वपूर्ण प्रभार सौंपा गया था। जबकि उपमुख्यमंत्री पद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं बिजेंद्र प्रसाद यादव और विजय कुमार चौधरी को दिए गए, जेडीयू ने निशांत को अपना भावी नेता घोषित किया है।
कैबिनेट में निशांत की तेजी से एंट्री और उसके बाद उन्हें एमएलसी बनाने की सियासी पहल दरअसल बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव दिखाता है। सालों तक नीतीश कुमार ने परिवारवाद का खुलकर विरोध किया और अपने परिवार को पार्टी के मामलों से दूर रखा।लेकिन अब जब यह वरिष्ठ नेता अपनी विरासत को सुरक्षित करने और पार्टी के भविष्य के नेतृत्व ढांचे को औपचारिक रूप देने की कोशिश कर रहे हैं, तो निशांत का आगे आना जेडीयू के भीतर एक सोची-समझी प्रक्रिया का संकेत है, जिससे राज्य के कामकाज में अगली पीढ़ी को आगे लाया जा रहा है।
गौरतलब है कि बिहार विधान परिषद चुनाव में सभी 10 उम्मीदवारों ने निर्विरोध जीत दर्ज कर ली है। कई उम्मीदवारों ने 11 जून को बिहार विधानमंडल जाकर जीत का सर्टिफिकेट भी लिया। कुल 10 सीटों के लिए 10 उम्मीदवार थे, इसलिए वोटिंग की नौबत ही नहीं आई।
भारतीय जनता पार्टी के सभी चारों उम्मीदवारों को जीत हासिल हो गई है। बिहार विधानपरिषद चुनाव में एनडीए के पास अपने 8 उम्मीदवारों के लिए पूरे वोट थे। जबकि नीतीश कुमार की खाली सीट पर भी जीत तय थी। इस तरह से बीजेपी के सभी चारों उम्मीदवार निर्विरोध विधान पार्षद निर्वाचित हो गए हैं।
उधर जदयू के भी चारों उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए। इनमें से एक ललन मंडल उर्फ ललन प्रसाद पूर्व सीएम नीतीश कुमार की खाली की गई सीट से उम्मीदवार थे। यानी उपचुनाव में भी एनडीए को किसी दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ा।
लोजपा रामविलास ने एनडीए की तरफ से अपने उम्मीदवार अशरफ अंसारी को मैदान में उतारा था। वो चिराग पासवान के पुराने वफादार नेताओं में से एक हैं। अब वो भी एलएलसी चुनाव में निर्विरोध जीत कर पहली बार अपने संसदीय जीवन की शुरूआत करेंगे। वहीं राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने सुनील कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया था। राज्यसभा चुनाव की तरह राजद को यहां चुनौती का सामना नहीं करना पड़ा और सुनील सिंह निर्विरोध विधान पार्षद चुन लिए गए।
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