मेरी जानकारी में नेशनल हाइवे पर देश का अकेला काठ पुल अब इतिहास के पन्ने में दफन होने के कगार पर है। मैं बात पूर्णिया की कर रहा हूं। यदि आपको पूर्णिया से गुजरना है तो नेशनल हाइवे-31 पर गड्डी चलानी ही होगी। ऐसे में आपको मौका मिलेगा एक लकड़ी पुल से गुजरने का। मैं फिलहाल उसी पुल की बात कर रहा हूं। इस पुल के ध्वस्त होते ही दफन हो जाएगा इसका समृद्धशाली अतीत। पूर्णिया के गौरवशाली इतिहास में चार चांद लगाने वाला ढाई सौ साल पुराने कप्तान पुल और उससे भी पुराने सिटी पुल के बाद अब जर्जर काठ पुल इतिहास बनने को तैयार है।
इस काठ पुल के साथ ही अंग्रेजों के पुल निर्माण की अद्भुत कला भी पूर्णिया से विदा हो जाएगी।बंगाल से सटे होने के कारण कोसी, परमान, कनकई और महानंदा की गोद में बसे पूर्णिया पर अंग्रेजों का काफी प्रभाव रहा। व्यापार के बहाने यहां आए अंग्रेजों ने इस इलाके का आर्थिक दोहन किया तो इसे दूसरे से इलाके से जोड़ने के लिए सड़क निर्माण भी करवाया। इसी दौरान अंग्रेजों ने सौरा नदी पर ईट से बना सिटी पुल, एनएच 31 पर लोहे से बना कप्तान पुल और काठ पुल का निर्माण करवाया। अंग्रेज जब इस इलाके में जम गये तो अपनी सुरक्षा और शासन के लिए अंग्रेजी पलटन भी यहां पहुंची। बताया जाता है कि अंग्रेजी पलटन को यहां लाने के लिए ही कप्तान पुल का निर्माण करवाया गया। सैंकड़ों साल सेवा के बाद अब यह पुल अब इतिहास के पन्नों में दफन हो चुका है। इसके बगल में अब दूसरा पुल बनकर तैयार है। इसका निर्माण 1735 में करवाया गया।
वर्ष 1934 का भूकंप देख चुका यह काठ पुल देश में अकेला एनएच स्थित काठ पुल है। लेकिन वक्त के थपेड़ों को झेलते हुए काठ पुल पर अब अपनी उम्र का प्रभाव साफ दिखने लगा है। बताते हैं कि जहां काठ पुल स्थित है वो जगह काफी गहरा है। जब कभी भी इस काठ पुल से कोई बड़ा या छोटा वाहन गुजरता था उसको पार करने का रोमांच ही कुछ और होता था। भले ही आज यह काठ पुल पूर्णिया के इतिहास के पन्नों में दर्ज होने के खड़ा मात्र रह गया है लेकिन एक समय इसकी उपयोगिता काफी अधिक थी। सौरा नदी पर बना सिटी पुल भी अंग्रेजों के पुल निर्माण के कौशल को बताता है। अब सिटी पुल ध्वस्त हो चुका है और यहां नया पुल तैयार होने की स्थिति में है।
Wikipedia क्या कहता है इस काठ पुल के बारे में-
During the British Rule, Purnia division ranges from Begusarai to Darzeeling and It is almost 250 years old District. This road joins Gulab Bagh - Line Bazar- Tatma Toli - Flower Mill- Polytechnic Chowk of British Purnia and at that time. It was the Outer Circle of Purnia, that's why Khazanchi Haat Thana (Naka) is still there on this road. The most peculiar thing above all is that, after more than 50 years of independence this road has a Wooden-Bridge or Kaath Pool on Purnia - Khuskibagh Road, and not surprisingly. This Bridge is the single Wooden Bridge in National Highways of India (NH-31).
मुझे आदमी का सड़क पार करना हमेशा अच्छा लगता है क्योंकि इस तरह एक उम्मीद - सी होती है कि दुनिया जो इस तरफ है शायद उससे कुछ बेहतर हो सड़क के उस तरफ। -केदारनाथ सिंह
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Wednesday, January 12, 2011
Friday, March 16, 2007
ये मज़ा और कहां

लगभग २ साल के अंतराल के बाद अपने शहर आना हुआ. लगे हाथ बता दूं कि मेरा शहर पूर्णिया है. बिहार के सिमांचल जिलों में एक है. इन २ सालों मे मेरा शहर साफ बदल गया है. शहर क्या गांव भी बदलाव की आंधी में चकाचक नज़र आ रहा है. हां, यहां मैं यह स्पष्ट कर दूं कि बदलाव पूर्णतया पोजेटिव है, सो खुश हूं.
यहां के बदलावो पर एक रिर्पोताज़ तैयार करने का दिल कर रहा है. दरअसल मै अपने शहर में दो ही दिन टिकने वाला हूं, इसलिए काम फटाफट करने की इच्छा है. अपने मित्र इरोज़ से मैंने इस बावत बात की तो वह बदलते पूर्णिया पे लिख्ने को तैयार हो गया .पेशे से किसान इरोज़ बोलता काफी अच्छा है. आशा है कि शहर को वह एक अलग नज़र से "अनुभव" में पेश करेगा. यहां मैं यह भी बता दूं कि कल मैं एक गांव की यात्रा पे निकल रहा हूं. वहां से आप लोगो के लिए आंचलिक लोक गीतो और "नाच" की एक खेप भी लाउंगा. मिला-जुलाकर गांव-शहर की कई बातों को लेकर आपसे जल्द हीं बतियाने वाला हूं.
हो सकता है प्रस्तुत करने में देर हो जाये, क्योंकि इंटरनेट और बिजली की स्थिती कुछ अच्छी नही है, खैर आप विश्वास करें जल्द हीं इरोज़ की खैप अनुभव में नज़र आयेगी.
(इन दिनों मैं संपूर्ण बिहार के दौरे पे निकाला हूं. सभी जिलो का चक्कर लगाने वाला हूं. २१ मार्च से मुजफ्फरपुर जिले से घुमना शुरू होगा......)
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