पिछले कुछ सालों में असम, बंगाल, मणिपुर, त्रिपुरा, नागालैंड जैसे सीमावर्ती राज्यों के साथ-साथ बिहार, महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली और यूपी जैसे राज्यों में डेमोग्राफिक चेंज (जनसांख्यिकी बदलाव) को लेकर विवाद सामने आए हैं. इन इलाकों में अवैध प्रवास, सीमा पार से घुसपैठ और फर्जी पहचान पत्रों के सहारे बसने के आरोप लगते रहे हैं.
सरकार का मानना है कि इस बदलाव का सीधा असर वहां के स्थानीय संसाधनों, रोजगार, सामाजिक ताने-बाने और राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर पड़ रहा है. खासकर जनजातीय क्षेत्रों में सांस्कृतिक पहचान और जमीन के अधिकारों को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं.
ऐसे में यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या सचमुच में भारत की डेमोग्राफी क्या बदल रही है? अब इसकी स्टडी के लिए केंद्र सरकार ने एक हाई लेवल कमेटी बना दी है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जब से कमेटी बनाए जाने का ऐलान किया है, तभी से इस मसले पर खूब चर्चा हो रही है. यह कमेटी एक साल के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी. हालांकि, जरूरत पड़ी तो इसका कार्यकाल 6 महीने और बढ़ाया जा सकता है.
इस कमेटी का काम घुसपैठ और दूसरे कारणों से बदल रही भारत की डेमोग्राफी पर स्टडी करना है. डेमोग्राफी चेंज से कैसे निपटा जा सकता है? इसे लेकर भी कमेटी अपने सुझाव देगी.
गृह मंत्री अमित शाह ने X पर पोस्ट कर कहा है कि अप्राकृतिक तरीके से डेमोग्राफी बदलना किसी भी देश के वर्तमान और भविष्य के लिए बड़ी चुनौती है. इसी चुनौती से निपटने के लिए 15 अगस्त 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक हाई-लेवल कमेटी बनाने का ऐलान किया था और अब सरकार ने इस कमेटी का गठन कर दिया है.
केंद्र सरकार लंबे समय से डेमोग्राफी चेंज होने की बात करती रही है. पिछले साल 15 अगस्त को लाल किले से भाषण देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डेमोग्राफी चेंज को एक बड़ी चुनौती बताया था.
अमित शाह डेमोग्राफी चेंज के लिए सबसे बड़ा कारण 'घुसपैठ' को मानते हैं. पिछले साल अक्टूबर में अमित शाह ने X पर आबादी को लेकर कुछ आंकड़े जारी किए थे. इसमें 1951 से 2011 तक की जनसंख्या के आंकड़े बताए गए थे.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में डेमोग्राफिक चेंज और घुसपैठ बड़ा मुद्दा था. इस मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने तत्कालीन ममता बनर्जी सरकार का घेराव किया था. इसी आधार पर बीजेपी ने विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को मात दी और पूर्ण बहुमत से सत्ता हासिल की. ऐसे में अब केंद्र सरकार द्वारा डेमोग्राफिक चेंज पर हाई लेवल कमेटी गठित करना अहम माना जा रहा है.
अब लोगबाग यह सवाल करने लगे हैं कि यह कमिटी आने वाले दिनों में कैसे काम करेगी. आसान भाषा में समझें तो यह कमेटी 6 काम करेगी-
1. डेमोग्राफिक चेंज से जो चुनौतियां पैदा हुईं, उन पर विचार करना।
2. डेमोग्राफिक चेंज की वजहें- जैसे सीमापार से अवैध घुसपैठ, आर्थिक वजहें और दूसरे सोशियो-इनवायरमेंटल फैक्टर्स की स्टडी करना।
3. डेमोग्राफिक चेंज के पीछे कुछ और अंडरलाइंग फैक्टर- जैसे बस्तियां बसाने के असामान्य पैटर्न, माइग्रेशन वगैरह की पहचान करना।
4. धार्मिक या सामाजिक कम्युनिटीज में पॉपुलेशन चेंज की एनालिसिस करना। खास तौर पर वहां, जहां पॉपुलेशन नॉर्मल ट्रेंड से काफी अलग तरीके से बदल रही है।
5. देश में मौजूद घुसपैठियों को कानूनी तरीके से पहचानने, हिरासत में लेने और डिपोर्ट करने की स्थायी मैकेनिज्म बनाना।
6. बॉर्डर मैनेजमेंट, आबादी कंट्रोल करने और इससे जुड़ी चीजों को मॉनिटर करने के लिए एक मैकेनिज्म सुझाना।
इनके अलावा कमेटी केंद्र और राज्य सरकारों के बीच अवैध घुसपैठ, डेमोग्राफिक चेंज के मामले में बेहतर को-ऑर्डिनेशन के लिए पॉलिसी बनाने का भी सुझाव देगी।
यह समिति मुख्य रूप से इन तीन क्षेत्रों पर प्रमुखता से काम करेगी-
• असामान्य बदलावों की जांच और विश्लेषण: समिति यह पता लगाएगी कि देश के किन खास क्षेत्रों और सामाजिक समुदायों में असामान्य रूप से जनसंख्या का असंतुलन पैदा हुआ है.
• अवैध प्रवासियों की पहचान और निर्वासन: भारत में अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों की पहचान करने, उन्हें हिरासत में लेने और उनके वापस भेजने के लिए एक स्थायी और मजबूत कानूनी व्यवस्था का सुझाव देना इस समिति का प्रमुख काम होगा.
• कड़े नियमों और नीति का निर्माण: भविष्य में किसी भी तरह की घुसपैठ को पूरी तरह रोकने के लिए सीमा प्रबंधन को कैसे मजबूत किया जाए, समिति इस पर सरकार को विस्तृत योजना सौंपेगी ताकि डेमोग्राफिक असंतुलन को सुधारा जा सके.
दरअसल सरकार पूरे देश के डेमोग्राफिक पैटर्न का वैज्ञानिक और संस्थागत अध्ययन कराना चाहती है, ताकि वास्तविक स्थिति के आधार पर ठोस नीतियां बनाई जा सकें. गौरतलब है कि भारत की बदलती डेमोग्राफी के पीछे घुसपैठ, धर्मांतरण, कथित लव जिहाद और ज्यादा आबादी को बड़ा कारण बताया जाता है. लेकिन अब तक आधिकारिक तौर पर इसका कोई ठोस कारण नहीं बताया गया है. उम्मीद है इस कमेटी की रिपोर्ट से इस सवाल का जवाब भी मिल जाएगा.
Girindra Nath Jha
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