गौरतलब है कि पंजाब में कुल 117 विधानसभा सीटें हैं। आम आदमी पार्टी के पास फिलहाल 95 सीटें हैं। ऐसे में सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही आप के लिए अपने मौजूदा विधायकों की स्थिति जानना अहम है। वहीं कांग्रेस, बीजेपी और शिअद भी अपने संगठन, संभावित उम्मीदवारों और स्थानीय मुद्दों की ताकत परख रहे हैं। इन सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर चुनावी रणनीति, उम्मीदवारों और कमजोर सीटों पर फोकस तय किया जा सकता है।
इन सबके बीच यदि आपको पंजाब के चुनावी मुद्दों को समझना है तो प्रदेश के तीन प्रमुख क्षेत्रों की आवोहवा से वाकिफ होना होगा। सूबे के तीन प्रमुख क्षेत्र हैं, मालवा, माझा और दोआबा। दरअसल, इन क्षेत्रों के मतदाताओं के मिजाज पर यहां के स्थानीय मुद्दों का खासा असर पड़ता है।
पंजाब में कुल 117 में से 69 विधानसभा सीटें मालवा क्षेत्र में आती हैं। पंजाब की राजनीति में कहा जाता है कि इसी क्षेत्र से उठी सियासी लहर पंजाब में सत्ता का रुख तय करती है। यही कारण है कि मालवा को पंजाब के मुख्यमंत्री की कुर्सी भी कहा जाता है। यह पंजाब का सबसे बड़ा क्षेत्र है और 15 जिलों में फैला हुआ है। प्रकाश सिंह बादल, कैप्टन अमरिंदर सिंह, भगवंत मान जैसे दिग्गज नाम इसी क्षेत्र से रहे हैं इसलिए सभी दल मालवा में बेहतर प्रदर्शन के लिए खास रणनीति बनाने में जुट चुके हैं।
साल 2022 के चुनावों की स्थिति देखें तो आप ने मालवा में एकतरफा जीत दर्ज की थी। यहां 69 में से आप को 66, कांग्रेस को 2 व शिरोमणि अकाली दल को एक सीट मिली थी। किसान और किसानी से जुड़े मसले, भूजल और कैंसर बेल्ट, बेरोजगारी व युवाओं का पलायन इस क्षेत्र के प्रमुख मुद्दे हैं।
अब आपको लेकर चलते हैं माझा का इलाका। अमृतसर, गुरदासपुर, तरनतारन और पठानकोट का इलाका माझा क्षेत्र कहा जाता है। यहां कुल 25 विधानसभा सीटें आती हैं। माझा को पंजाब की पंथक और राजनीतिक राजधानी माना जाता है। भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे होने के कारण यह इलाका राष्ट्रीय सुरक्षा, तस्करी और रक्षा रणनीति की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। साल 2022 में यहां 25 में से आप ने 16 सीटें, कांग्रेस ने 7, शिअद-भाजपा ने 1-1 सीटें जीती थीं। इस क्षेत्र में आप के समक्ष अपने पुराने प्रदर्शन को दोहराने, जबकि कांग्रेस और शिअद को इस पारंपरिक गढ़ में पंथक और ग्रामीण वोट बैंक को वापस पाने की चुनौती रहेगी। पठानकोट और अमृतसर जैसे शहरी इलाकों में हिंदू-सिख समीकरण साधकर पार्टियां जनाधार जुटाने की तैयारी में हैं। नशाखोरी व सीमा पार तस्करी, सीमावर्ती किसानों व व्यापारियों की समस्याएं यहां प्रमुख मुद्दे हैं।
माझा के बाद सभी की निगाहें दोआबा पर रहती है। सतलुज और ब्यास नदियों के बीच का भूभाग दोआबा सूबे की राजनीति में खास स्थान रखता है। चार जिलों जालंधर, होशियारपुर, कपूरथला और नवांशहर तक फैले इस क्षेत्र में कुल 23 विधानसभा सीटें हैं। साल 2022 में आप ने यहां 10, कांग्रेस ने 9, भाजपा ने 1 व शिअद और बसपा ने 1-1 सीट जीती थीं। इस क्षेत्र में दलित और एनआरआई पंजाबी खासे असरदार रहते हैं। इसलिए दलों का जोर यहां इन दोनों वर्गों को साधने पर रहेगा। दोआबा में दलित वोट बैंक का ध्रुवीकरण, एनआरआई और आव्रजन नीतियां, अवैध खनन और औद्योगिक व बुनियादी विकास सरीखे मुद्दे चुनाव में खासे उछाले जाते रहे हैं।
इन सबके बीच भाजपा ने चुनावी रोडमैप तैयार करना शुरू कर दिया है। नशे के खिलाफ पार्टी मुखर है। भाजपा ने ‘ट्रिपल C’ यानी क्राइम, करप्शन और चिट्टा (ड्रग्स) को केंद्र में रखकर अपने प्रचार अभियान को हॉट पॉलिटिकल टॉपिक बनाने की सोच रही है। इसके साथ ही युवा, रोजगार, कानून-व्यवस्था और जातीय समीकरण पर भी पार्टी जोर देने की तैयारी में है।
दूसरी ओर आम आदमी पार्टी की नवगठित पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी (पीएसी) की गुरुवार को पहली बैठक हुई। आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में उनके आवास पर हुई बैठक में पीएसी से जुड़े पंजाब के नए सदस्य सीएम भगवंत सिंह मान और मंत्री हरपाल सिंह चीमा भी शामिल हुए। मनीष सिसोदिया ने बताया कि बैठक में मुख्य रूप से पंजाब, गोवा और गुजरात में होने वाले चुनावों को जितने को लेकर गहन मंथन हुआ। उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता भगवंत सिंह मान के काम से बेहद खुश है और उन्हें दोबारा बतौर मुख्यमंत्री देखना चाहती है, जबकि गोवा और गुजरात की जनता भाजपा के कुशासन से त्रस्त हो चुकी है और अब बदलाव चाहती है।
हर दल के बड़े नेता अब पंजाब की तरफ नजर लगाए हुए हैं, आने वाले दिनों में चुनावी अभियानों से जुड़ी खबरें खूब सामने आएगी लेकिन असल बात तो वही है कि सत्ता में आम आदमी पार्टी वापसी कर पाएगी या फिर पंजाब की जनता कांग्रेस या फिर भाजपा को मौका देगी।
देखिए, आने वाले दिनों में पंजाब में क्या होता है, फिलहाल ग्राउंड की कहानी यही है कि सियासी रणनीतिकार सूबे के तीन प्रमुख क्षेत्रों मालवा, माझा व दोआबा के लिए अलग-अलग चुनावी रणनीति बनाने में जुटे हैं।