कांग्रेस के साथ वंदे मातरम विवाद के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पश्चिम बंगाल के दौरे पर गुरुवार रात सिलीगुड़ी पहुंचे। उनका यह दौरा मुख्य रूप से सीमा सुरक्षा और प्रशासनिक समीक्षा पर केंद्रित है।
गृह मंत्री के इस दौरे को रणनीतिक लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के लिए बेहद संवेदनशील इलाका है। यही संकरा गलियारा देश के पूर्वोत्तर राज्यों को बाकी भारत से जोड़ता है। ऐसे में यहां सीमा सुरक्षा, निगरानी, इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
इस अहम दौरे में अमित शाह सशस्त्र सीमा बल के जवानों से मुलाकात करेंगे, सीमा सुरक्षा परियोजनाओं की शुरुआत करेंगे और साथ ही सीमा सुरक्षा बल, सशस्त्र सीमा बल, खुफिया एजेंसियों व राज्य अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे। यह एक महीने में शाह का सिलीगुड़ी का दूसरा दौरा है।
गृह मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, इस दौरे का सबसे अहम फोकस देश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा, सीमा प्रबंधन को मजबूत करना और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करना है। गृह मंत्री सिलीगुड़ी में उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे, जिसमें सीमा सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों की समीक्षा की जाएगी।
गृह मंत्री अपने दौरे के पहले दिन शुक्रवार को सीमा सुरक्षा और सीमा प्रबंधन से जुड़े कई कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। इस दौरान सीमा सुरक्षा को मजबूत करने वाली विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और कई परियोजनाओं की आधारशिला रखे जाने का कार्यक्रम है।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर सुरक्षा ढांचे को और मजबूत करना, सुरक्षा बलों की ऑपरेशनल क्षमता बढ़ाना और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। सरकार लगातार देश की सीमाओं पर बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, निगरानी व्यवस्था और तकनीकी क्षमता विकसित करने पर जोर दे रही है।
गृह मंत्री अपने दौरे के दौरान सशस्त्र सीमा बल यानी SSB के जवानों से भी मुलाकात करेंगे। SSB भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालता है।
गौरतलब है कि SSB भारत-नेपाल की करीब 1,751 किलोमीटर लंबी और भारत-भूटान की करीब 699 किलोमीटर लंबी सीमा की सुरक्षा करता है। दोनों सीमाएं सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं और सिलीगुड़ी क्षेत्र इन सीमाओं के व्यापक सुरक्षा नेटवर्क का अहम हिस्सा है। भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमा पर सुरक्षा की चुनौती अन्य अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से कुछ अलग है। इन सीमाओं पर लोगों की आवाजाही, भौगोलिक परिस्थितियां और खुली सीमा की प्रकृति सुरक्षा एजेंसियों के लिए अलग तरह की चुनौतियां पैदा करती हैं। ऐसे में इंटेलिजेंस इनपुट, स्थानीय स्तर पर समन्वय, निगरानी और तकनीकी संसाधनों की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
नजर चिकन नेक’ पर
सिलीगुड़ी कॉरिडोर को आम बोलचाल में ‘चिकन नेक’ कहा जाता है। यह भारत के नक्शे में एक संकरा भू-भाग है जो देश के उत्तर-पूर्वी राज्यों को भारत के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। इसकी रणनीतिक स्थिति इसे देश के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल करती है। ये कॉरिडोर लगभग 60 किलोमीटर लंबा और करीब 22 किलोमीटर तक चौड़ा बताया जाता है। इसके आसपास भारत की कई अंतरराष्ट्रीय सीमाएं हैं। एक तरफ बांग्लादेश, दूसरी तरफ नेपाल और भूटान तथा उत्तर में तिब्बत क्षेत्र है। इस वजह से सिलीगुड़ी कॉरिडोर का महत्व केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं है, बल्कि ये पूरे पूर्वोत्तर की कनेक्टिविटी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। पूर्वोत्तर के आठ राज्यों तक सड़क और रेल संपर्क के लिए यह क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। किसी भी आपात स्थिति में इस कॉरिडोर की सुरक्षा और निर्बाध कनेक्टिविटी बेहद अहम हो जाती है।
यही कारण है कि केंद्र सरकार यहां इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा दोनों को लेकर लगातार समीक्षा करती रही है। अमित शाह की बैठक में सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा व्यवस्था, सीमा क्षेत्रों में निगरानी और सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय प्रमुख मुद्दों में हैं।
अमित शाह का पश्चिम बंगाल दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है, जब भारत की पूर्वी सीमा पर सुरक्षा और बॉर्डर मैनेजमेंट लगातार केंद्र सरकार की प्राथमिकता में है। पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश के साथ लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है। इसके अलावा राज्य का उत्तरी हिस्सा नेपाल और भूटान की सीमाओं के करीब है।
इस लिहाज से सिलीगुड़ी में होने वाली बैठक का दायरा केवल भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमा तक सीमित नहीं माना जा सकता। पूरे पूर्वी और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था, सीमावर्ती इलाकों में कनेक्टिविटी और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय भी चर्चा का हिस्सा बन सकता है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार की रणनीति अब सीमा सुरक्षा को मल्टी-लेयर सिक्योरिटी मॉडल के तहत मजबूत करने की है। इसमें भौतिक सुरक्षा के साथ-साथ तकनीकी निगरानी, बेहतर सड़क और संचार नेटवर्क, इंटेलिजेंस इनपुट और एजेंसियों के बीच तत्काल सूचना साझा करना शामिल है।
अमित शाह के दौरे का एजेंडा केवल सीमा सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा। वह सिलीगुड़ी में तीन नए आपराधिक कानूनों पर आधारित एक प्रदर्शनी का भी उद्घाटन करेंगे। इन तीन कानूनों में भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) शामिल हैं। इन कानूनों ने औपनिवेशिक दौर से चले आ रहे पुराने आपराधिक कानूनों की जगह ली है और एक जुलाई 2024 से लागू हुए हैं।
प्रदर्शनी के जरिए नए कानूनों के प्रमुख प्रावधानों और उनके महत्व की जानकारी लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी। केंद्र सरकार देशभर में इन कानूनों को लेकर जागरूकता अभियान चला रही है, ताकि आम नागरिकों के साथ-साथ पुलिस, जांच एजेंसियों और न्याय व्यवस्था से जुड़े लोगों को इनके प्रावधानों की जानकारी हो।
अमित शाह की बैठक का एक अहम पहलू विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय भी है। सिलीगुड़ी जैसे रणनीतिक इलाके में ये समन्वय और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
गृह मंत्री की बैठक में सुरक्षा एजेंसियों की मौजूदा तैयारियों के साथ भविष्य की चुनौतियों से निपटने की रणनीति पर भी चर्चा होने की संभावना है।
सिलीगुड़ी कॉरिडोर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर का सीधा संबंध सुरक्षा से है। मजबूत सड़क और संचार नेटवर्क न केवल आम लोगों की कनेक्टिविटी बेहतर करते हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर सुरक्षा बलों की तेज आवाजाही और लॉजिस्टिक सपोर्ट में भी मदद करते हैं।
अमित शाह के दौरे के दौरान जिन परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास होगा, उन्हें इसी व्यापक बॉर्डर सिक्योरिटी रणनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है।
अमित शाह का ये दौरा कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है। एक तरफ भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे SSB की तैयारियों की समीक्षा होगी। वहीं, दूसरी तरफ रणनीतिक सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी नजर रहेगी। इसके अलावा बांग्लादेश सीमा से जुड़े व्यापक सुरक्षा परिदृश्य, पूर्वोत्तर की कनेक्टिविटी और सीमा क्षेत्रों में चल रही परियोजनाओं की प्रगति भी इस दौरे को महत्वपूर्ण बनाती है। कुल मिलाकर अमित शाह का सिलीगुड़ी दौरा ‘बॉर्डर सिक्योरिटी, बेहतर कॉर्डिनेशन और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर’ की केंद्र सरकार की रणनीति का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है।