बिहार में सीमांचल की राजनीति अब करवट लेने लगी है। केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह इन सीमांत इलाकों को लेकर योजनाएं बनाने लगे हैं। इसी कड़ी में उन्होंने बिहार के सीमांत जिले में तीन दिन का प्रवास किया।
सीमांचल के तीन दिवसीय दौरे के दौरान गृह मंत्री का मुख्य फोकस सीमा सुरक्षा, घुसपैठ और जनसांख्यिकीय बदलाव पर रहा। गुरुवार को अररिया में सीमावर्ती जिलों के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में भी यही मुद्दे प्रमुख रहे। नेपाल-भारत सीमा पर उत्पन्न चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई और संबंधित अधिकारियों को कई आवश्यक निर्देश दिए गए।
अररिया में उन्होंने सीमा सुरक्षा प्रबंधन और वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम पर समीक्षा की। समाहरणालय स्थित परमान सभागार में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने भारत–नेपाल सीमा सुरक्षा प्रबंधन के साथ दूसरे चरण के वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम को लेकर समीक्षात्मक बैठक की।
भारत–नेपाल सीमा सुरक्षा के तहत खुली सीमा का लाभ उठाकर होने वाली अवैध गतिविधियों और घुसपैठ को रोकने के लिए प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ सीमा सुरक्षा में लगी एजेंसी एसएसबी को कई आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इससे पहले बुधवार को उन्होंने किशनगंज में एक उच्च स्तरीय बैठक की थी।
अपने तीन दिवसीय दौरे में गृह मंत्री लगातार सीमावर्ती इलाकों में बदलती आबादी के पैटर्न पर खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों के साथ चर्चा की। अवैध प्रवासियों और उनके माध्यम से बनाए जा रहे वोट बैंक की पहचान को लेकर भी कड़े निर्देश दिए गए।
गृह मंत्री ने वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के जरिए सीमावर्ती गांवों में बुनियादी ढांचा मजबूत करने और पलायन रोकने जैसे मुद्दों पर अधिकारियों से राय लेते हुए चर्चा की। बिहार के सीमावर्ती गांवों के इंफ्रास्ट्रक्चर, संस्कृति, पर्यटन, जीवन और आर्थिक उन्नति को वाइब्रेंट करने की बात कही गई।
मोदी सरकार के लिए सीमावर्ती गांवों की सुरक्षा और सर्वांगीण विकास को प्राथमिकता करार दिया गया है। बैठक में घुसपैठ मुक्त सीमांचल को लेकर अधिकारियों से सतर्कता बरतने और चिन्हित कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। किशनगंज और अररिया में हुई बैठकों में गृह मंत्री अमित शाह के अलावा केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, बिहार सरकार के डिप्टी सीएम एवं गृह मंत्री सम्राट चौधरी, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, डीजीपी विनय कुमार, एसएसबी के डीजीपी समेत कई प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी तथा सात सीमावर्ती जिलों के डीएम–एसपी मौजूद थे।
सीमांचल का इलाका नेपाल और बांग्लादेश सीमा से सटा है और चिकन नेक कॉरिडोर के पास स्थित है। घुसपैठ और सीमावर्ती सुरक्षा को लेकर ये इलाका संवेदनशील है।
बता दें कि इससे पहले अररिया में अमित शाह ने सीमा सुरक्षा बल के जवानों को संबोधित किया। उन्होंने कहा, "बिहार सरकार के गृहमंत्रालय, डीएम, एसपी और कई संगठनों के साथ तीन दिन में मीटिंग कर के हम एक कार्ययोजना बना रहे हैं।"
गृह मंत्री ने कहा कि सीमा के 10 किलोमीटर के अंदर सभी अतिक्रमण हटाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सीमा से घुसपैठिए सिर्फ चुनाव को प्रभावित नहीं करते हैं, वे गरीबों के राशन में भी हिस्सेदारी ले जाते हैं, रोगार में युवाओं की संभावनाओं को क्षीण करते हैं और राष्ट्र की सुरक्षा के लिए भी बहुत बड़ा चुनौती हैं। सीमा के 10 किलोमीटर के अंदर जितने अवैध अतिक्रमण हैं, उन सभी अतिक्रमणों को ध्वस्त किया जाएगा।
अमित शाह ने कहा कि सीमांचल से घुसपैठियों को बाहर करने का मिशन शुरू होने वाला है। घुसपैठियों की वजह से सीमांचल की डेमोग्राफी बदली है। सीमा की सुरक्षा के साथ-साथ अवैध स्मगलिंग, नार्कोटिक्स और कई गतिविधियां हैं जिनपर नजर रखनी होगी। इसकी एसओपी बनाई जानी चाहिए, ताकि नीचे से ही जवान अलर्ट रहे। खुली सीमा की सुरक्षा बड़ी चुनौती है। SSB जवानों के लिए सरकार सुविधाएं बढ़ा रही है। आप सीमा की सुरक्षा में लगे हैं आपका परिवार हमारी जिम्मेदारी है।
गौरतलब है कि नेपाल बॉर्डर की सुरक्षा का जिम्मा एसएसबी के पास है। भारत की जमीनी सीमाएं 7 देशों चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार और अफगानिस्तान से लगती है। जबकि, समुद्री सीमाएं श्रीलंका, मालदीव और इंडोनेशिया के साथ लगती हैं।
नेपाल और भूटान बॉर्डर की सुरक्षा एसएसबी, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश बॉर्डर की सुरक्षा बीएसएफ, चीन बॉर्डर की सुरक्षा भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और म्यांमार बॉर्डर की सुरक्षा असम राइफल्स के जिम्मे है।
बिहार से सीधा नेपाल का बॉर्डर लगता है। जबकि, बांग्लादेश बॉर्डर की दूरी बिहार के किशनगंज से करीब 20 किमी है। भारत से नेपाल का 1751 किलोमीटर लंबा बॉर्डर लगता है। इसमें से सबसे अधिक 729 किमी बिहार से सटा है।
अपनी इस यात्रा में केंद्रीय गृह मंत्री ने दूसरी सबसे अहम बात डेमोग्राफी को लेकर कही। उन्होंने कहा कि यह सरकार डेमोग्राफी परिवर्तन को लेकर भी संकल्पित है। इस संदर्भ में एक उच्च स्तरीय समिति सिर्फ सीमांचल ही नहीं बल्कि पूरे देश की बदली डेमोग्राफी का गहराई से अध्ययन कर रिपोर्ट करेगी। इसके बाद घुसपैठिये को देश से बाहर निकालने की कवायद को अंजाम दिया जाएगा। और इस कार्य की शुरुआत बिहार से होगी।
अमित शाह का बार बार सीमांचल के किसी जिले में आने को भविष्य की चुनावी राजनीति के रूप में देखा जा सकता है। इस इलाके की विधानसभा और लोकसभा सीटों पर भाजपा अपनी पकड़ और भी मजबूत करने की योजनाएं बनाती रही है। वहीं यह इलाका पश्चिम बंगाल से भी जुड़ा हुआ है, जहां आने वाले दिनों में विधानसभा चुनाव होंगे।
लोगबाग यह भी कह रहे हैं कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की नजर सीमांचल के उन सीटों पर हैं जहां मुस्लिम आबादी 50 प्रतिशत या इस से कम हो।
अब देखना यह है कि अमित शाह के इस दौरे के बाद बिहार के इन इलाकों में राजनीति कौन सा गुल खिलाती है।