Friday, October 09, 2026

यूपी में राजनीति का ‘चिराग मॉडल’

उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले चिराग पासवान राजनीति के नए दरवाजे खोलते नजर आ रहे हैं। अपने पिता और पार्टी संस्थापक रामविलास पासवान की पुण्यतिथि का बड़ा कार्यक्रम बिहार की जगह लखनऊ में कराकर उन्होंने उत्तर प्रदेश की सियासत में अपनी सक्रियता का साफ संदेश दे दिया है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बिहार की तरह यूपी में भी भाजपा के लिए ' चिराग मॉडल ' फायदेमंद साबित होगा!
पिछले कुछ महीने से चिराग पासवान की पार्टी ने यूपी की सभी 403 विधानसभा सीटों को लेकर संगठन विस्तार की तैयारी कर रही है। पार्टी का फोकस बूथ स्तर तक संगठन खड़ा करने और संभावित उम्मीदवारों को तैयार करने पर है। करीब 100 विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव प्रभारियों की तैनाती की जा चुकी है।

चिराग पासवान ने अपने पिता रामविलास पासवान की पुण्यतिथि के कार्यक्रम के लिए लखनऊ को चुनकर यूपी में चिराग मॉडल को शुरु करने की कोशिश की है। गुरुवार को लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के संस्थापक राम विलास पासवान की 6वीं पुण्यतिथि पर लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी जुटान देखने को मिली। 

लोजपा पार्टी अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के न्योते पर सीएम योगी ने भी कार्यक्रम में शिरकत की। इसके अलावा राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और अनुप्रिया पटेल, मंत्री दयाशंकर सिंह, लोनी विधायक नन्द किशोर गुर्जर भी शामिल हुए।

लखनऊ के दयाल बाग में आयोजित पुण्यतिथि समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 50 वर्ष पहले रामबिलास पासवान ने जो सामाजिक लड़ाई शुरू की थी, उसकी राजनीतिक विरासत को अब उनके पुत्र चिराग पासवान आगे बढ़ा रहे है। मुख्यमंत्री योगी ने यूपी में इस आयोजन के लिए आभार जताया।

दरअसल लखनऊ में आयोजन के जरिए चिराग ने यूपी की राजनीति में अपनी मौजूदगी और पार्टी के विस्तार की महत्वाकांक्षा दोनों को सामने रखा है। रामविलास पासवान की जयंती का कार्यक्रम भी इससे पहले लखनऊ में आयोजित किया गया था। अब पुण्यतिथि का बड़ा आयोजन राजधानी में होने से यह संकेत और मजबूत हुआ है कि LJP (रामविलास) यूपी को बिहार के बाहर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए अहम मान रही है।

पुण्यतिथि के बहाने पार्टी अपनी स्थिति के आकलन के ही साथ ही दूसरों को शक्ति का अहसास करा पासी समाज को लामबंद करने की भी कोशिश में जुटी है। इससे पहले 5 जुलाई को पार्टी संस्थापक राम विलास पासवान की जयंती भी आईजीपी में आयोजित की गई थी। अभी 27 सितंबर को ‘यूथ बोले तो’ कार्यक्रम प्रयागराज में था।

वहीं कुछ महीने पहले लोजपा (रामविलास) सांसद और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के रिश्तेदार अरुण भारती ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा था- गूंजे धरती-आसमान, पंडित पासी-पासवान! उस वक्त भारती के इस नारे के सियासी निहितार्थ भी निकाले गए थे। राजनीतिक जानकारों की मानें तो लोजपा (रामविलास) यूपी में अपनी पैठ जमाने के लिए नए सियासी समीकरण बना रही है। इसके जरिए वह उन वर्गों को भी साथ लाने की जुगत में है जो अभी यूपी में उसके साथ नहीं हैं।

चिराग पासवान ने हाल ही में बयान दिया था कि नागालैंड में लोजपा (रामविलास) अपने दम पर अकेले चुनाव लड़ेगी। वहां पार्टी के दो विधायक हैं। जबकि उत्तर प्रदेश में गठबंधन को लेकर अभी बातचीत और संगठनात्मक स्तर पर तैयारी चल रही है। चिराग ने कहा कि पार्टी यूपी में किसी भी स्थिति के लिए तैयार रहना चाहती है।

विधानसभा चुनाव को लेकर चिराग पासवान ने कहा, 'मैं सभी 403 सीटों के लिए तैयारी करूंगा. हमारी पार्टी लंबे समय से गठबंधन की राजनीति का हिस्सा रही है, लेकिन गठबंधन में रहने का मतलब सिर्फ सीटें हासिल करना नहीं है.'

चिराग ने कहा कि पार्टी को हर सीट पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार रहना चाहिए. इससे संगठन मजबूत होता है और जरूरत पड़ने पर सहयोगी दलों को भी इसका फायदा मिलता है. इसी तरह उनकी पार्टी बिहार की सभी 243 सीटों के लिए तैयारी की है. इसके अलावा पंजाब में भी 117 सीटों पर काम किया जा रहा है.

गौरतलब है कि यूपी चुनाव 2027 के लिए लोजपा (रामविलास) ने तैयारी काफी दिन पहले से ही कर दी थी। इसी के तहत 27 सितंबर को चिराग पासवान ने प्रयागराज में 'यूथ बोले तो' कार्यक्रम किया था। अब लोजपा ने यूपी चुनाव से पहले चिराग पासवान की कम से कम 20 रैलियां अलग-अलग जिलों में कराने की तैयारी की है। ताकि एक माहौल तैयार किया जा सके। इनके जरिए लोजपा रामविलास की नजर यूपी के दलित के साथ युवा वोटर पर है।

दरअसल उत्तर प्रदेश की राजनीति में दलित वोट लंबे समय से मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के साथ जुड़ा रहा है, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में बसपा का प्रदर्शन बहुत की कमजोर रहा था। ऐसे में दलित वोट बैंक को लेकर नए समीकरण बनने लगे हैं।

चुनावी आंकड़ों पर यदि बात की जाए तो 2024 में भाजपा को गैर-यादव ओबीसी गैर-जाटव दलित वोटों में नुकसान हुआ था। ये वोट बैंक इंडिया गठबंधन की ओर शिफ्ट हो गया था। इसी की वजह से इंडिया गठबंधन यूपी में लोकसभा की 80 में से 43 सीटों पर जीत दर्ज कर सका था। ऐसे में चिराग मॉडल यदि ठीक से काम कर जाए तो भाजपा को फायदा मिल सकता है।

माना जा रहा है कि यदि चिराग पासवान यूपी में दलित मतदाताओं के बीच अपनी अलग पहचान बनाने में सफल होते हैं, तो इससे नुकसान इंडिया गठबंधन को हो सकता है। फिर चाहे वो एनडीए में लड़कर चुनाव लड़ें, या अकेले। लोकसभा चुनाव में जो वोटर भाजपा से नाराज था, उसने इंडिया गठबंधन को वोट किया था। अगर चिराग के रूप में दलित वोटर को विकल्प मिलेगा तो उनके लिए वोट कर सकते हैं।

वहीं दूसरी ओर खबर आ रही है कि विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले उत्तर प्रदेश की सियासत में एक और बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम होने जा रहा है। समाजवादी पार्टी से बगावत कर चुके तीन विधायक अब औपचारिक तौर पर भाजपा का दामन थामेंगे। इनमें राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी शामिल हैं। नवरात्रि में 14 अक्तूबर को अमेठी में आयोजित कार्यक्रम में ये तीनो विधायक भाजपा की सदस्यता ग्रहण करेंगे।

आने वाला हर दिन उत्तर प्रदेश के लिए चुनावी तैयारियों का दिन होगा! हर दल अपनी स्थिति मजबूत करते दिखेंगे। बाद बाकी जनता तो सबकुछ देख ही रही है!




Girindra Nath Jha
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