Thursday, May 15, 2008

मानवता का एक और चेहरा


जयपुर- एक स्वयंसेवी संगठन से जुड़ी ब्रितानी नवयुवती ईस्थर शायलर इन दिनों जयपुर में बम धमाकों से पीड़ित लोगों की सेवा करने में जी जान से जुटी हुई है।


शायलर सितंबर में आपदाओं से निबटने और ग्रामीण विकास के लिए काम करने वाले स्वयंसेवी संगठन 'आरईडीआर' (रजिस्टर आफ इंजिनियर्स फार डिसास्टर रिलीफ) के साथ काम करने के लिए भारत आई थी।जयपुर में मंगलवार की शाम हुए धमाकों की खबर मिलते ही वह सवाई मानसिंह अस्पताल पहुंची और घायलों की मदद में जुट गई।


शायलर ने कहा, "मैंने इजरायल में लंबे समय तक आपातकालीन सेवा में काम किया है। मैं इस तरह की परिस्थितियों का सामना करने की अभ्यस्त हूं। मुझे मानवता के हित में काम करना अच्छा लगता है।"


बर्मिघम की रहने वाली शायलर कहती है मुझे भारत बहुत पसंद है और राजस्थान तो और भी ज्यादा। उसने यहां आने वाले पर्यटकों को सलाह दी कि वो किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार होकर आएं। शायलर ने कहा कि यहां आपको अच्छे से अच्छे और बुरे से बुरे अनुभव हो सकते हैं लेकिन ऐसा किसी भी देश में हो सकता है।

5 comments:

सुशील कुमार said...

पढकर अच्छा लगा। दिल खुश भी हो गया।

Pooja Prasad said...

Girindra, achi post hai! tasvir ka 1 rukh ye bhe hai, or sambhavath isi kaaran buree taqatein baar baar hame todne kee koshish karti hain..
badia.

डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल said...

इस तरह के प्रकरण सामने लाये जाने चाहिए. क्या कभी-कभी ऐसा नहीं लगता कि हमारा लोग धर्म कर्म की और ज्ञान की बडी-बडी बातें तो खूब करते हैं, लेकिन असल में कुछ भी करने से कतरा जाते हैं. इसके विपरीत, जिन लोगों पर हमारा भौतिकतावादी होने का इल्ज़ाम लगाते रहते हैं, वे हमसे अधिक मानवीय सिद्ध् होते हैं.

दिनेशराय द्विवेदी said...

शायलर को मेरा नमन।

Udan Tashtari said...

शायलर को साधुवाद!! ऐसे व्यक्तित्व प्रेरणा देते हैं और इन्सानियत के जिन्दा होने का प्रमाण भी.