यह कहानी बिहार के पूर्णिया जिला की है, जहां शनिवार को एक साथ चार हजार से अधिक योजनाओं को 100 से अधिक गांव में शुरू किया गया। जिला के 60 अधिकारी अलग अलग ग्रामीण इलाके गए और योजनाओं की शुरुआत की। ऐसे वक्त में जब रोजगार को लेकर हर कोई परेशान है, उस समय एक विशेष अभियान शुरू कर गांव-गांव में रोजगार सृजन करना एक उम्मीद वाली खबर लगती है।
बिहार के किसी भी जिले के लिए यह एक अनोखा प्रयोग है, जहां एक ही दिन जिलाधिकारी हों या फिर अन्य अधिकारी सीधे गांव पहुंचते हैं और योजनाओं की शुरूआत करते हैं। इस स्पेशल ड्राइव में पंचायत सरकार भवन के शिलान्यास से लेकर सात निश्चय से संबंधित योजनाओं को हरी झंडी दिखाई गई। जिलाधिकारी राहुल कुमार ने खुद रूपौली, धमदाहा, भवानीपुर और बनमनखी के ग्रामीण इलाकों का दौरा किया और कई योजनाओं का उद्घाटन किया।
शनिवार को गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत पूर्णिया के 246 पंचायतों में 4604 योजनाओं पर काम शुरू किया गया। इसके अलावा जिला के चनका, धुसर टीकापट्टी, कुल्लाखास, बिक्रमपुर और बियारपुर पंचायत में पंचायत सरकार भवन का शिल्यान्यास किया गया। प्रत्येक पंचायत भवन के लिए 12394 श्रम दिवस सृजित किया गया है और इसे छह महीने में तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस अनोखे ड्राइव में Solid and Liquid Waste Management (SLWM) के तहत भी कई योजनाओं पर काम शुरू किया गया। स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए पंचायत स्तर पर घर-घर कूड़ेदान दिए जाने की शुरूआत हुई है। जिला के रूपौली प्रखंड के कोयली सिमड़ा पश्चिम पंचायत से इस योजना की शुरूआत की गई। इस योजना के तहत पंचायत स्तर पर कम से कम 30 लोगों को रोजगार मिलेगा।
प्रधानमंत्री आवास योजना से लेकर मवेशी के लिए केटल शेड बनाने की बात हो या फिर आगंनबाड़ी निर्माण का काम, इन सभी योजनाओं की शुरूआत की गई। इन सभी का लक्ष्य ग्रामीण स्तर पर रोजगार का सृजन करना है।
ऐसे वक्त में जब हर कोई परेशान है, हर कोई कोरोना महामारी के मार को झेल रहा है, रोजगार को लेकर संकट के बादल छंटने का नाम नहीं ले रहे हैं, ठीक उसी वक्त इस तरह के स्पेशल ड्राइव से लोगों को उम्मीद दिखने लगती है, एक बेहतर कल को लेकर। गांव में रोजगार का सृजन इस वक्त की सबसे बड़ी चुनौती है। भले ही इस ड्राइव में राज्य सरकार की सामान्य योजनाएं ही हैं लेकिन एक साथ इनकी शुरूआत करने से लोगों को काम तो मिलने लगा है। यह उम्मीद वाली खबर है।