चुनाव को लेकर पंजाब में हर दल अब अलर्ट मोड में है। कोई यात्रा निकाल रहा है, कोई आरोप- प्रत्यारोप लगाने में जुटा है तो कोई इधर से उधर नेताओं को करने में लगा हुआ है।
इन सबके बीच कांग्रेस पार्टी युवाओं को अपने पाले में करने के लिए योजना बनाने लगी है। आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी पंजाब कांग्रेस का फोकस इस बार युवाओं पर है। कांग्रेस ने इस बार सचिन पायलट पर दांव लगाया है और उन्हें पंजाब का नया प्रभारी बनाया है। सचिन पायलट सूबे में युवाओं को एकजुट करने की पूरी तैयारी में जुट गए हैं। उन्होंने यूथ कांग्रेस पदाधिकारियों और युवा नेताओं से फीडबैक लेने का काम शुरू कर दिया है, जिसका उद्देश्य है ऐसे नेताओं की पहचान करना जो बूथ स्तर पर सक्रिय हो और युवाओं के बीच पार्टी की पहुंच बढ़ सके। आने वाले दिनों में वे पंजाब की यात्रा भी करेंगे।
दरअसल, पंजाब में 18 से 29 साल के युवा मतदाताओं की संख्या करीब 48.9 लाख से अधिक है और ये कुल वोटरों की संख्या का करीब 22 फीसदी है। पंजाब के विभिन्न राजनीतिक दल इन्हें अपने पक्ष में करने की कवायद में जुटे हुए हैं। इसी क्रम में मंगलवार को सचिन पायलट ने दिल्ली के इंदिरा भवन में पंजाब युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष शुभम शर्मा समेत अन्य नेताओं के साथ बेठक की और उनका फीडबैक लिया।
इस बैठक का उद्देश्य 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी को मजबूत करना, जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं से समन्वय बढ़ाना और संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करना है। कांग्रेस चुनावों से पहले एक तरह से 'जेन Z' वोटरों को साधने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है।
दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी के पंजाब प्रभारी सतीश पूनिया ने दावा किया है कि पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 में उनकी पार्टी चमत्कार करेगी। उन्होंने एक बार फिर साफ किया कि पार्टी कुल 117 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और अपनी स्ट्रैटजी, मैनेजमेंट और कैंपेन के बलबूते बहुमत का आंकड़ा पार कर लेगी।
भाजपा- कांग्रेस की सियासी तैयारियों के बीच राज्य की सत्तारुढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) ने गुरुवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह एहसास होने के बाद कि पंजाब ने बीजेपी को नकार दिया है, अब वे पंजाबियों से राजनीतिक बदला लेने और चुनाव से पहले उनके लिए मुश्किलें खड़ी करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। आप के वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) के ऑपरेशन ने तीन दिनों से पूरे पंजाब में सरकारी कामकाज को प्रभावित किया है। इससे लोगों को बहुत परेशानी हो रही है, जबकि छापों में कुछ हासिल नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का विपक्षी पार्टियों द्वारा शासित राज्यों के खिलाफ ईडी, इनकम टैक्स विभाग और चुनाव आयोग का इस्तेमाल करना उनकी पहचान बन गया है, लेकिन पंजाब डरने वाला नहीं है और तीन करोड़ पंजाबी लोकतांत्रिक तरीके से भाजपा को जवाब देंगे।
राजनीतिक दलों की कथाओं के बीच पंजाब की राजनीति में एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला सियासी फेरबदल देखने को मिल रहा है। इंफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) के पूर्व चर्चित और तेज तर्रार अधिकारी निरंजन सिंह राजनीति की पिच पर भाग्य आजमाने जा रहे हैं। उन्होंने पंजाब की खडूर साहिब सीट से सांसद और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत आरोपी अमृतपाल सिंह की पार्टी ‘अकाली दल (वारिस पंजाब दे)’ का दामन थाम लिया है। उनके इस राजनीतिक कदम ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।
मीडिया से बात करते हुए निरंजन सिंह ने वारिस पंजाब दे में शामिल होने का कारण भी बताया। उन्होंने वारिस पंजाब दे में शामिल होने का कारण पंजाब में नशे और भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान को बताया। बता दें कि अमृतपाल सिंह ने पंजाब में नशे के खिलाफ खालसा वहीर मुहिम शुरू की थी। उन्होंने दावा किया कि इस अभियान से बड़ी संख्या में युवाओं को नशा छोड़ने के लिए प्रेरणा मिली।
गौरतलब है कि निरंजन सिंह मई 2021 में सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने कई चर्चित मादक पदार्थ मामलों की जांच की थी। इनमें करोड़ों रुपये के जगदीश भोला मादक पदार्थ तस्करी मामले की जांच भी शामिल है। उन्होंने पीएमएलए के तहत जांच किए गए इस मामले में पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया और सरवन सिंह फिल्लौर समेत कई वरिष्ठ नेताओं से पूछताछ की थी।
निरंजन सिंह का प्रशासनिक और जांच का इतिहास काफी सुर्खियां बटोर चुका है। ईडी में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई हाई-प्रोफाइल और बेहद संवेदनशील मामलों की जांच की कमान संभाली थी। पंजाब के बहुचर्चित ड्रग्स मामले में अकाली दल के सीनियर नेता बिक्रम सिंह मजीठिया से लंबी पूछताछ करने वाले अधिकारियों में निरंजन सिंह प्रमुख रूप से शामिल थे। उस दौरान मजीठिया से पूछताछ और अचानक निरंजन सिंह के ट्रांसफर को लेकर पंजाब की राजनीति में भारी भूचाल आया था और यह मुद्दा लंबे समय तक सुर्खियों में रहा था। अब उसी तेवर वाले पूर्व अधिकारी का एक ऐसे सांसद की पार्टी में शामिल होना, जो खुद गंभीर आपराधिक मामलों और आतंकवाद से जुड़े आरोपों का सामना कर रहा है, सवाल उठाता है। इस सियासी कदम से आने वाले दिनों में पंजाब की राजनीति में नए समीकरण बनते नजर आ रहे हैं, जहां एक तरफ प्रशासनिक अनुभव और सख्त छवि का दावा है, तो दूसरी तरफ विवादित पृष्ठभूमि का साया है।
चुनाव नजदीक हो और बिजली बिल माफी की खबरें न आए तो सियासी खिचड़ी बनती नहीं दिखती है। ऐसे में पंजाब से खबर आई है कि राज्य सरकार ने 518 गोशालाओं के 100 करोड़ रुपये से अधिक के बिजली बिल माफ किए हैं। इनमें अमृतसर जिले की 14 गोशालाएं भी शामिल हैं। यह जानकारी पंजाब गो सेवा आयोग के उपाध्यक्ष कीमती भगत ने जिला प्रशासनिक परिसर में अधिकारियों और गोशाला प्रबंधकों के साथ बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में दी। दरअसल चुनाव से पहले ऐसी खबरें बताती है कि आने वाले समय में सूबे की सियासत अभी और भी कई रंग दिखाएगी।
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