Friday, July 10, 2026

पंजाब :धर्म और पंथ की रणनीति से लेकर लोक लुभावन योजना तक!




पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार को धुरी से बहुप्रतीक्षित ‘मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना' लॉन्च की. लाभार्थी महिलाओं के खातों में तीन महीने की सम्मान राशि एकमुश्त जमा की गई. योजना के तहत पंजाब की महिलाओं के खाते में 1000-1500 रुपये हर महीने दिए जाने हैं. सामान्य वर्ग की महिलाओं को 1000 रुपये, और अनुसूचित जाति की महिलाओं को 1500 रुपये . 

आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल
ने मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना को दुनिया का सबसे बड़ा महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम बताया था. सोशल साइट एक्स पर अरविंद केजरीवाल ने लिखा, पंजाब की सभी मां, बहनों और बेटियों को बहुत-बहुत बधाई. 1 जुलाई को उनके खाते में तीन महीने के पैसे एक साथ आएंगे. हर जनरल कैटेगरी की महिला को तीन हजार और हर SC कैटेगरी की महिला को 4500 रुपये मिलेंगे. एक परिवार में यदि एक से अधिक महिलाएं हैं, तो हर महिला को ये सम्मान राशि मिलेगी. पूरी दुनिया का ये सबसे बड़ा महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम है.

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर 8 मार्च को विधानसभा के विशेष सत्र में इस योजना की घोषणा की थी. उसके बाद वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में इस योजना के लिए 9300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया. पंजाब सरकार का दावा है कि योजना से पंजाब की करीब 97 फीसदी वयस्क महिलाओं को फायदा मिलेगा.

इस हफ्ते पंजाब की इस घटनाक्रम को देखकर आपको असम की याद आई होगी. देखा जाए तो भगवंत मान भी असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के रास्ते पर चल रहे हैं. असम चुनाव से पहले हिमंता बिस्वा सरमा ने महिलाओं को बिहू के मौके पर एकमुश्त बड़ी रकम की सौगात दी थी. 

आम आदमी पार्टी की सरकार ने दिल्ली में महिलाओं के लिए योजना शुरू की थी, लेकिन वक्त रहते उस पर अमल नहीं हो सका. लगता है, भगवंत मान दिल्ली में आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल की हार से सबक लेते हुए चुनाव से पहले ही महिलाओं के खाते में पैसा भेजने का फैसला किया है. 

चुनावी राजनीति में जनता तक रकम की सौगात पहुंचाने की कहानी अब हर राज्य में चुनाव से पहले देखने को मिल रही है, ऐसे में पंजाब की सरकार भी क्यों पीछे रहती! 

इन सब लोक लुभावन योजनाओं के बीच पंजाब की राजनीति धर्म और पंथ के इर्द-गिर्द भी घूमने लगी है। पिछले कुछ दिनों के भीतर ऐसे कुछ सियासी घटनाक्रम सामने आए हैं जिनका असर निश्चित ताैर पर भावी चुनाव पर पड़ेगा। इसी के मद्देनजर राजनीतिक पार्टियां भावी समीकरणों से नफा और नुकसान के आकलन में जुट गई हैं।

दलों को जहां पंथक वोट बैंक बिखरने की आशंका सता रही हैं वहीं सिख-हिंदू एकता पर भी दलों की नजर गड़ी है।

पंजाब में सिख और हिंदू के बिखराव की बात कोई नहीं करेगा क्योंकि जीत के लिए यहां दोनों समुदाय के लोगों का वोट बेहद जरूरी है। यहां हिंदू और मुसलमान का शोर भी नहीं सुनाई देगा मगर फिर भी सियासत धूरी धार्मिक समीकरणों के आसपास ही घूमेगी।

शिरोमणि अकाली दल (शिअद) प्रदेश की सबसे पुराने पंथक पार्टी मानी जाती है मगर साल 2022 के बाद से थोड़ा हाशिये पर चल रही है। पहला झटका तब लगा जब शिरोमणि अकाली दल (वारिस पंजाब दे) का गठन हुआ और दूसरी चोट शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) ने पहुंचाई। इस दौरान शिअद बिखरा और कुछ दिन पहले ही दाखा से शिअद के विधायक मनप्रीत सिंह अयाली भी शिरोमणि अकाली दल (वारिस पंजाब दे) के खेमे में चले गए। अयाली बड़े पंथक नेता माने जाते हैं, जो जाहिर तौर पर शिअद को नुकसान पहुंचाकर वारिस पंजाब दे को मजबूत करेंगे। इस घटनाक्रम के बाद पंथक वोट बैंक का बिखराव निश्चित माना जा रहा है।

दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी पिछले दिनों से कुछ बड़े पंथक मसलों से संबंधित विवादों में उलझी हुई है। पहला विवाद बिना एसजीपीसी और श्री अकाल तख्त की रायशुमारी के सूबे में नया बेअदबी रोधी संशोधन कानून लागू कराना और दूसरा विवाद सीएम भगवंत सिंह मान की कथित विवादित वायरल वीडियो से जुड़ा है।

दोनों मामलों में श्री अकाल तख्त साहिब ने संज्ञान लेकर सीएम के खिलाफ हुक्मनामा जारी किया है। आप हाईकमान को लगता है कि इससे पंथक वोट बैंक का नुकसान हो सकता है, लिहाजा पार्टी ने अब हिंदू वोट बैंक पर भी पूरी नजरें गढ़ा ली हैं। पिछले दिनों हिंदू समुदाय के लोगों से जुड़ी पांच बड़ी घोषणाएं इसी का नतीजा हैं।

भाजपा-कांग्रेस को भी मालूम है कि जीत के लिए हिंदू-सिख वोट बैंक बेहद जरूरी है। भाजपा यह भी जानती है कि सूबे में पंथक वोट बैंक हमेशा उनसे दूर ही रहा है मगर इस बार पार्टी की रणनीति थोड़ी अलग है। भाजपा कुछ पंथक नेताओं को पार्टी से जाेड़ रही है और अध्यक्ष पद का चेहरा भी इस बार सिख ही दिया है। इतना हीं नहीं पार्टी महाराजा रणजीत सिंह के सरकार-ए-खालसा समावेशी शासन मॉडल को उजागर करते हुए यह साबित करने की कोशिश की है कि राज्य में सामाजिक सद्भाव और व्यापक प्रतिनिधित्व के प्रति भाजपा पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

कांग्रेस के पास सिख नेताओं की कमी तो नहीं है मगर फिलहाल पंथक और हिंदू वोट बैंक पर पकड़ और बनानी पड़ेगी। कांग्रेस का फोकस जट सिख और एससी वोट बैंक पर ज्यादा हो सकता है।

बीते दिनों बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों के दफ्तर में महाराजा रणजीत सिंह की तस्वीर लगाकर पार्टी ने पंथक राजनीति को लेकर बड़ा संदेश देने की कोशिश की थी. 2011 की जनगणना के अनुसार पंजाब की कुल आबादी में सिख समुदाय की हिस्सेदारी करीब 58 प्रतिशत है, जबकि हिंदू आबादी लगभग 39 प्रतिशत है. ऐसे में राज्य की राजनीति में सिख वोट बैंक की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. पंजाब में अक्सर धार्मिक और पंथक मुद्दे चुनावी चर्चा के केंद्र में रहते हैं.

अब सामने विधानसभा चुनाव है! पंजाब के चुनाव पर सबकी नज़र है। आने वाले दिनों में पंजाब से ऐसे ही कई कहानियां सामने आएगी और चुनावी प्लेट के जायेके का रंग बदलने की कोशिश करेगी!

Girindra Nath Jha
www.anubhaw.blogspot.com
Chanka Residency
09661893820

No comments: