Friday, June 05, 2026

कैसा रहेगा पंजाब का चुनावी जायका!


पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 में अब ज्यादा समय नहीं बचा है. भारतीय जनता पार्टी की तरह ही कांग्रेस ने भी अपनी कमर कस ली है और चुनावी तैयारियां शुरू कर दी हैं. इसी क्रम में कांग्रेस ने राज्य संगठन में बड़े फेरबदल की योजना बना रही है और पंजाब प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी किसी और को सौंप रही है. 

गौरतलब है कि पंजाब चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने भी अपना प्रदेश अध्यक्ष बदला है. अब केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब बीजेपी की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इसके बाद कांग्रेस में भी बदलाव की चर्चा तेज हो गई. 

पिछले हफ्ते कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पंजाब के शीर्ष पांच नेताओं को दिल्ली बुलाया था. इस मीटिंग में पंजाब प्रदेश अध्यक्ष के नए नाम पर चर्चा हुई. इसके संकेत पंजाब के पूर्व उप मुख्यमंत्री और गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर रंधावा ने दिए.

जिन पांच नेताओं को दिल्ली बुलाया गया था उनमें चरणजीत सिंह चन्नी, प्रताप बाजवा, सुखजिंदर रंधावा, डॉ. अमर सिंह और राजा वडिंग शामिल थे. इनके अलावा, राहुल गांधी, कांग्रेस पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल और अन्य पार्टी नेता भी बैठक में मौजूद रहे.

वहीं दूसरी ओर पंजाब के राजनीतिक गलियारों में पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह की 'घर वापसी' की अटकलें तेज हो गई हैं. यानी, कैप्टन अमरिंदर बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में वापसी कर सकते हैं. ऐसी अटकलें इसलिए लगाई जा रही हैं, क्योंकि हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के बड़े नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा का कहना है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह कांग्रेस के संपर्क में हैं.

कैप्टन अमरिंदर सिंह की कांग्रेस वापसी की अटकलें ऐसे समय लगाई जा रही हैं, जब कुछ ही महीनों में पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं. 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले ही कैप्टन अमरिंदर कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में चले गए थे.

इन सबके बीच भाजपा ने पंजाब में नशे की समस्या को अपने राजनीतिक अभियान का प्रमुख मुद्दा बनाने का फैसला किया है. पार्टी राज्यव्यापी जनसंपर्क कार्यक्रमों और यात्राओं की तैयारी कर रही है. उसका प्रयास है कि नशे के खिलाफ लड़ाई को सिर्फ चुनावी वादा नहीं, बल्कि एक सामाजिक मिशन के रूप में पेश किया जाए. अमित शाह के लिए भी यह कोई नया मुद्दा नहीं है. वे इस पर काफी पहले से काम करते आए हैं.

यह एक ऐसा मुद्दा है जो जाति, क्षेत्र और राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर लोगों को प्रभावित करती है. यह देखना बाकी है कि यह रणनीति मतदाताओं को कितना प्रभावित कर पाती है, लेकिन इतना तय है कि भाजपा इसे 2027 चुनाव का प्रमुख मुद्दा बनाने जा रही है. 

इस चुनाव में लंबे समय तक राज्य में सहयोगी दलों के सहारे अपनी राजनीतिक मौजूदगी बनाए रखने वाली बीजेपी अपने दम पर लड़ने और सत्ता के लिए मजबूत दावेदारी पेश करने की रणनीति पर काम कर रही है। यहीं कारण है कि वो अब पहले की तुलना में कहीं अधिक सक्रिय और आक्रामक नजर आ रही है।
वहीं अकेले चुनाव लड़ने की बात करते हुए भाजपा और भी बहुत कुछ सोच रही है. दशकों तक पंजाब में भाजपा, शिरोमणि अकाली दल (SAD) के साथ गठबंधन के जरिए राजनीति करती रही है. लेकिन इस बार अकेले लड़ने की बात करके वह जनता के बीच अपनी आवाज मुखर तरीके से पहुंचाने की कोशिश में है.

पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भाजपा ने पूरे राज्य में अपना अभियान तेज कर दिया है. इसके लिए वो काफी हद तक आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व नेताओं राघव चड्ढा और संदीप पाठक के अनुभव पर भरोसा कर रही है, जिन्होंने राज्य में आम आदमी पार्टी के उभार में अहम भूमिका निभाई थी.

भाजपा अपनी रणनीति के केंद्र में संगठनात्मक विस्तार और नशे की समस्या को भी रख रही है. राज्य में भाजपा का लक्ष्य साफ है, संगठन को मजबूत करना और नशे की समस्या को राजनीतिक मुद्दा बनाना है.

इस बार भाजपा अकेले चुनाव लड़ने के लिए भी तैयार नजर आ रही है. पंजाब की राजनीति में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए सहयोगियों पर निर्भर रहने का दौर खत्म होता दिख रहा है. असम, बंगाल के नतीजों के बाद भाजपा नेताओं के अंदर बहुत उत्साह नजर आ रहा है.

माना जा रहा है कि यदि भाजपा पूरी ताकत और संसाधनों के साथ मैदान में उतरे, तो पंजाब में सत्ता हासिल करना अब कोई दूर का सपना नहीं है. 

लोगबाग कह रहे हैं कि पंजाब की राजनीतिक पटकथा में इस बार दो नेताओं की भूमिका अहम होने वाली है. पहला संदीप पाठक और दूसरा राघव चड्ढा. दोनों ने दिल्ली के बाहर आम आदमी पार्टी की सबसे बड़ी सफलता दिलाने में अहम योगदान दिया था. अब ये दोनों भाजपा में हैं.

संदीप पाठक को आम आदमी पार्टी के 'पंजाब मॉडल' का प्रमुख रणनीतिकार माना जाता रहा है। पाठक ने बूथ स्तर की मैपिंग, डेटा विश्लेषण, सर्वेक्षण और स्वयंसेवकों के मजबूत नेटवर्क के जरिए 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की जमीनी पकड़ मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। राजनीति में उनका काम करने का तरीका हमेशा पर्दे के पीछे रहकर संगठन को मजबूत करने वाला माना जाता रहा है। वहीं, राघव चड्ढा ने पंजाब में आम आदमी पार्टी के प्रमुख चेहरे के रूप में काम किया। उन्होंने दिल्ली नेतृत्व और पंजाब इकाई के बीच समन्वय स्थापित करने के साथ-साथ चुनावी रणनीति को जमीन पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

इन दोनों नेताओं के आलावा भी आनेवाले दिनों में ऐसे कई चेहरे सामने आयेंगे जो 'पंजाबी पोलिटिकल जायके' को लजीज बनाने का काम करेंगे! 

आने वाले दिनों में पंजाब पर देश की निगाहें होगी! कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, अकाली दल की राजनीतिक गुटबाजी के बीच भाजपा अपने प्रचार तंत्र से किस अंदाज में प्रहार करेगी, इस पर सभी की नजर रहेगी! अभी तो पंजाब की चुनावी कहानी शुरू ही हुई है!

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