Friday, February 13, 2026

बंगाल डायरी: फिर से सुर्खियों में हुमायूं कबीर

पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ महीनों से एक नाम की सबसे ज्‍यादा चर्चा है, और यह नाम है- हुमांयू कबीर। मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद शिलान्‍यास समारोह के बाद हुमांयू कबीर की बात देश भर में होने लगी। प्रदेश के भरतपुर से विधायक हुमायूं कबीर को हाल में तृणमूल कांग्रेस पार्टी की अनुशासन समिति ने पार्टी से सस्‍पेंड कर दिया था और उसके बाद उन्होंने अपनी पार्टी- जन उन्नयन पार्टी की नींव रखी।
गुरुवार को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में जन उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर ने बाबरी यात्रा मार्च की शुरुआत कर फिर से सुर्खियां बटौरनी शुरु कर दी है। हुमांयू कबीर की यह यात्रा नदिया जिले के प्लासी से शुरू होकर मुर्शिदाबाद के रेजुनगर तक गई। मार्च के दौरान बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए, जिन्होंने सामाजिक न्याय और सांप्रदायिक सौहार्द से जुड़े मुद्दों को उठाने का दावा किया। हुमायूं कबीर ने कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य लोगों को एकजुट करना और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के प्रति जागरूकता फैलाना है।

प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मार्ग में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए। स्थानीय स्तर पर इस मार्च को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है।

मुर्शिदाबाद में बाबरी यात्रा को लेकर पूरे प्रदेश में राजनीतिक गरमाहट तेज हो गई है। हुमायूं कबीर ने बाबरी मस्जिद की नींव रखने के बाद सैकड़ों समर्थकों के साथ 22 किलोमीटर लंबी पदयात्रा निकाली। यह यात्रा नादिया-मुर्शिदाबाद सीमा के पलाशी से बेलडांगा तक जा रही है। यात्रा के दौरान हुमायूं कबीर ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वह किसी से डरने वाले नहीं हैं और बाबरी मस्जिद का निर्माण होकर रहेगा। कबीर ने पुलिस प्रशासन पर पक्षपात का आरोप भी लगाया।

उन्होंने दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में मुसलमान 100 सीटें जीतकर पश्चिम बंगाल की राजनीति में निर्णायक शक्ति बनेंगे।

तृणमूल कांग्रेस से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर द्वारा प्रस्तावित 'बाबरी यात्रा' के रूट में अंतिम समय पर कटौती की गई है। गुरुवार सुबह शुरू होने वाली यह रैली पहले नदिया जिले के पलाशी से उत्तर दिनाजपुर के इटाहार तक 265 किलोमीटर की दूरी तय करने वाली थी, लेकिन अब यह केवल 22 किलोमीटर तक सीमित होकर मुर्शिदाबाद के रेजीनगर में समाप्त हो जाएगी।

रैली के स्वरूप में भी बड़ा बदलाव आया है। पूर्व योजना के अनुसार, इसमें 100 वाहनों का काफिला और लगभग 600 लोग शामिल होने थे, परंतु अब इसे एक साधारण पदयात्रा का रूप दे दिया गया है।

कबीर ने दावा किया कि तीनों जिलों से आवश्यक पुलिस अनुमति न मिल पाने के कारण रूट छोटा करना पड़ा, जबकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इतनी लंबी रैली के लिए औपचारिक अनुमति मांगी ही नहीं गई थी।

भरतपुर से विधायक कबीर ने कहा कि यह यात्रा बेलडांगा में प्रस्तावित 'बाबरी मस्जिद' के निर्माण को लेकर फैलाई जा रही भ्रांतियों को दूर करने के लिए है। उन्होंने बुधवार को मस्जिद की नींव रखते हुए बताया था कि लगभग 55 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह ढांचा तीन साल में तैयार होगा, जिसका गेट ही पांच करोड़ रुपये का होगा।

बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष व भाजपा विधायक सुवेंदु अधिकारी ने बेलडांगा में 'बाबरी मस्जिद' के नाम से हो रहे निर्माण पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। अधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें मंदिर या मस्जिद के निर्माण से कोई समस्या नहीं है, लेकिन वे बंगाल की धरती पर मुगल शासक बाबर के नाम का महिमामंडन बर्दाश्त नहीं करेंगे।

अधिकारी ने कहा कि हिंदू मंदिर बनाएं और मुस्लिम मस्जिद, इसमें कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन मैं बाबर का नाम नहीं लिखने दूंगा। आने वाले दिनों में भाजपा बंगाल से बाबर का नाम मिटाने के लिए काम करेगी।

दूसरी ओर, मस्जिद का निर्माण शुरू करने वाले हुमायूं कबीर ने भाजपा पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि दो साल के भीतर मस्जिद का ढांचा खड़ा कर दिया जाएगा और इसके साथ एक अस्पताल व विश्वविद्यालय भी बनाया जाएगा।

कबीर ने आरोप लगाया कि जब मुस्लिम मस्जिद बनाना चाहते हैं, तो विरोध किया जाता है। इस बीच, तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी कबीर पर निशाना साधते हुए कहा कि मंदिर-मस्जिद की राजनीति करने वाले कबीर और भाजपा में कोई अंतर नहीं है।

गौरतलब है कि हुमायूं कबीर मुर्शिदाबाद जिले की भरतपुर विधानसभा सीट से विधायक हैं। रेजिनगर के एक सामान्य परिवार से आने वाले हुमायूं कबीर का राजनीतिक सफर उठापटक भरा रहा है। उन्हें मुर्शिदाबाद की राजनीति का शानदार खिलाड़ी माना जाता है। उन्होंने मुर्शिदाबाद में कांग्रेस के दिग्गज नेता अधीर रंजन चौधरी के करीबी सहयोगी के रूप में राजनीति में कदम रखा। वह 2009 से कांग्रेस की मुर्शिदाबाद इकाई के महासचिव थे।

साल 2011 के विधानसभा चुनाव में हुमायूं कबीर कांग्रेस के टिकट पर रेजिनगर से पहली बार विधायक चुने गए। साल 2012 में अधीर रंजन चौधरी से मतभेदों की वजह से वह तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए और विधायक पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि, उसी साल उपचुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। साल 2015 में उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण तृणमूल कांग्रेस से छह साल के लिए निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद वह 2018 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए और 2019 का लोकसभा चुनाव मुर्शिदाबाद सीट से लड़ा, लेकिन हार गए।

साल 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले वह फिर से तृणमूल कांग्रेस में लौटे और भरतपुर से विधायक चुने गए। लेकिन फिर 2025 में वे ममता बनर्जी से दूरी बनाकर अपनी अलग पार्टी बना ली है।

हुमायूं कबीर अपने तीखे और कई बार सांप्रदायिक बयानों की वजह से पहले भी विवादों में रहे हैं। अप्रैल 2025 में वक्फ बिल को लेकर मुर्शिदाबाद में हुए सांप्रदायिक दंगों के बाद भी उनके बयानों पर काफी बवाल मचा था।

अब देखना है कि आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हुमांयू कबीर तृणमूल कांग्रेस या फिर भाजपा को कितना नुकसान पहुंचा पाते हैं। या फिर वे केवल बंगाल के सियासी मैदान के फुटबॉल बने रह जाएंगे!

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