Friday, February 06, 2009

शहर के दो रूप

बदलते शहर को देखना है, चले आईए, पीछे-पीछे। हम आपको बताएंगे। ज्यादा तेज चलने की जरूरत नहीं, बस कदम से कदम मिलाकर चलना होगा, तो बढ़ें। पश्चिम बंगाल की सीमा पर बिहार का एक जिला है किशनगंज। यहां है बदलते भारत की दो अलग-अलग तस्वीर। रात और दिन में फर्क कराता एक शहर किशनगंज।

कई चीजों को एक साथ लेकर किशनगंज आगे बढ़ रहा है। सड़क और व्यवसाय इस शहर की रगों में तेजी से आगे की ओर बढ़ रहा है। कुछ ऐसा ही फारबिसगंज में देखने को मिल रहा है। नेशनल हाइवे को लेकर तेजी से हो रहे काम इन इलाकों की तकदीर बदलने में मुख्य भूमिका निभा रही है। जहां तक किशनगंज की बात है, यहां व्यवसायी वर्ग एक संग आगे बढ़ रहे हैं।


किशनगंज में चाय उद्योग ने अपना पांव पसारा है। खेती और प्रसंस्करण ने चाय के बाजार में अपनी उपस्थिती दर्ज की है। सीमांचल के बाजारों में यहां के चाय की तूती बज रही है। चाय की खेती ने यहां किसानों की नई फौज तैयार कर रही है। महानगरों के उपनगरों की तरह यहां भी फार्म हाउस संस्कृति का उदय हो चुका है। यहां के कुछ खास उद्योगपति इस संस्कृति के वाहक बनने जा रहे हैं और इसमें उन्हें सफलता भी मिल रही है।


उभरते धनाड्य इस शहर की तकदीर को बदल रहे हैं। यहां के मेडिकल कॉलेज यहां की आबोहवा में बड़े बदलाव ला रहे हैं। बाहर के राज्यों से आए छात्र यहां की शहरी संस्कृति में बदलाव की झड़ी लगा दी है। कॉलेज चौराहे पर आकर बरबरस मन कह उठता है-

मुझे तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे,
इक शाम चुरा लूं
गर बुरा न लगे।


चलिए, इस शहर की दूसरी तस्वीर से आपको रूबरू कराया जाए। इस शहर की शाम साफ अलग है (हालांकि हर शहर की शाम अलग ही होती है)। बांग्लादेश सीमा से घुसपैठियों की बड़ी फौज यहां आ रही है, जो शहर में एक अलग ही आवोहवा का प्रसार कर रही है। इन बांग्लादेशियों के घुसपैठ से शहर में अपराध का ग्राफ काफी तेजी से बढ़ रहा है, यहीं आकर यह शहर एक भयावह तस्वीर पेश करती नजर आती है।


इन तमाम अच्छाई- बुराईयों के बीच यह शहर मेरे दोस्तों और मुझे खास पसंद आया, क्योंकि यहां से पश्चिम बंगाल का एक शहर रामपुर की दूरी महज 10-15 मिनट (अपने वाहन से) है और यहां एक अच्छा सा बार (शराबखाना) है, जो हमारा अड्डा था। यहां बैठकर घंटों बतियाने का एक अलग ही मजा है...............।

3 comments:

PN Subramanian said...

किसी भी कसबे को शहर में फ़िर एक बड़े शहर में बदलते देखना अपने आप के एक अनुभव ही होता है.बंगलादेशी घुसपैठियों की बात सुन हैरानी होती है. क्या वहां की पुलिस एकदम निष्क्रिय है?. बार तो किशनगंज में भी होगा उसके लिए रामपुर जाने की जरूरत क्यों पड़ती है. आलेख के लिए आभार.

गिरीन्द्र नाथ झा said...

PN Subramanian साब, किशनगंज में बार नही है, इसी कारण हमे रामपुर का रूख करना पड़ा.
शुक्रिया आप यहाँ पहुंचे

mamta said...

मेरे ख़्याल से हर शहर के दो रूप होते है और हमेशा ही रहते है ।

किशनगंज से अवगत कराने का शुक्रिया ।