Friday, October 23, 2026

पंजाब चुनाव का कीवर्ड होगा ' नशा मुक्त पंजाब ' !

देशभर में चुनाव आयोग और मतदाता सूचियों के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) को लेकर विपक्ष और विभिन्न संगठनों के तीखे विरोध प्रदर्शनों और चुनावी धांधली के आरोपों के बीच, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर पूरी तरह सक्रिय है। उत्तर प्रदेश से लेकर पंजाब तक, चुनावी माहौल बनाने में भाजपा जुट गई है। लोगबाग अक्सर कहते हैं, भाजपा चुनावी मशीन है! उसे बस चुनाव चाहिए। वैसे लोकतंत्र में सबकुछ चुनाव से ही सम्भव है!

चलिए, अब बात करते हैं पंजाब की। पंजाब में अगले साल फरवरी-मार्च में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा बेहद खास रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। ऐसा लग रहा है कि पार्टी पंजाब में पश्चिम बंगाल मॉडल पर चुनाव लड़ेगी। पश्चिम बंगाल की ही तरह पंजाब के लोगों को भरोसा दिलाया जाएगा कि भाजपा सत्ता की प्रबल दावेदार है। इसके लिए सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) और प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस को उन्हीं के गढ़ में चुनौती देने का फैसला किया गया है।

गौरतलब है कि भाजपा ने यही रणनीति पश्चिम बंगाल में भी अपनाई थी, जब ममता बनर्जी के गढ़ भवानीपुर और नंदीग्राम में उनसे सीधे दो-दो हाथ किया गया था। इसी तरह तृणमूल कांग्रेस के गढ़ दक्षिण बंगाल और कोलकाता में बीजेपी ने पूरा जोर लगाया था।  यहां की 130 सीटों पर टीएमसी बेहद मजबूत थी। बीजेपी ने इस बार सबसे ज्यादा ताकत इन्हीं सीटों पर लगाई। इसका सीधा लाभ पार्टी को मिला और उसने ममता बनर्जी को सत्ता से बेदखल कर दिया।


वैसे तो पंजाब की राजनीति में किसान हित, कृषि अर्थव्यवस्था, सिख समुदाय से जुड़े सवाल प्रमुख माने जाते रहे हैं लेकिन भाजपा ने नशे के मुद्दे को अहमियत देने का फैसला लिया है।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह दशहरे के दिन पंजाब के 3 जिलों में गए और नशे की भेंट चढ़े 3 लोगों के परिवारों से मिले। अमित शाह भावुक होकर तीनों परिवारों से मिले और उन्हें न्याय दिलाने का आश्वासन दिया। अमित शाह से मिलने के बाद तीनों परिवार अब न्याय के लिए आश्वस्त भी दिख रहे हैं।

गृह मंत्री अमित शाह ने नशा विरोधी अभियान से जुड़े तीन पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने गुरुदासपुर, संगरूर और मानसा में पीड़ितों से मुलाकात की। मानसा में गृह मंत्री अमित शाह ने परविंदर सिंह झोटा के परिवार से मिलकर गृह मंत्री ने न्याय का आश्वासन दिया। झोटा की नशे के विरोध के चलते हत्या कर दी गई थी। पंजाब में बीजेपी चुनावों से पहले ड्रग्स की बिक्री को लेकर आप सरकार पर हमलावर है। सत्ताधारी आम आदमी पार्टी बीजेपी के दावों को खारिज करती आई है।

गौरतलब है कि अमित शाह ने पंजाब में नशे के खिलाफ अवाजा उठाने पर मारे गए तीन व्यक्ति के परिवारजनों से ऐसे वक्त पर मुलाकात की है जब कुछ समय पहले बीजेपी ने राज्यव्यापी नशामुक्त पंजाब यात्रा निकाली थी। अमित शाह ने इस यात्रा के समापन पर कहा था कि राज्य में मुद्दे तो कई हैं लेकिन बीजेपी ड्रग्स और नशामुक्त पंजाब बनाने के एजेंडे के साथ ही चुनाव मैदान में उतरेगी। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि पंजाब में बढ़ते नशे (ड्रग्स) के कारोबार और उसके खिलाफ आवाज उठाने वाले कार्यकर्ताओं/पीड़ितों के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए अमित शाह ने यह दौरा किया था।

हालांकि यदि आप गौर करेंगे तो पंजाब में किसान भी मुद्दा है। किसान आंदोलन के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में विश्वास बहाली भाजपा के लिए चुनौती रही है। ऐसे में नशा के खिलाफ भाजपा ने कदम बढ़ाकर सवाल खड़े करने की कोशिश की है। वहीं, नशा तस्करी का सवाल अब कानून-व्यवस्था से आगे बढ़कर केंद्र और राज्य सरकार के बीच जवाबदेही का मुद्दा बन गया है।

बीते 30 सितंबर को जालंधर में भाजपा की ‘नशामुक्त पंजाब यात्रा’ के समापन पर अमित शाह ने दिसंबर 2029 तक पंजाब को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य रखा था।

भाजपा के लिए नशा एक ऐसा मुद्दा है जिसके सहारे वह पंजाब में अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता बढ़ा सकती है। पार्टी को कानून-व्यवस्था, सुरक्षा और नशे के कारोबार पर सरकार को घेरने का अवसर मिल रहा है। अमित शाह की 2029 की समय-सीमा वाली घोषणा पार्टी को एक स्पष्ट चुनावी वादा भी देती है। शिरोमणि अकाली दल के सामने नशा सबसे जटिल चुनौती है। उसे नशे, रोजगार और कानून-व्यवस्था पर अपनी विश्वसनीयता साबित करनी होगी। अकाली दल को अपने शासनकाल से जुड़े नशे के पुराने आरोपों पर भी मतदाताओं का भरोसा बहाल करना होगा।


पंजाब में नशे के खिलाफ विभिन्न सरकारों के दौरान कार्रवाई के आंकड़े सामने आए हैं। 2002 से 2007 तक कांग्रेस सरकार ने 111 किलोग्राम हेरोइन और 83 लाख इंजेक्शन व गोलियां बरामद कीं। 2007 से 2012 तक अकाली-भाजपा सरकार में 1,049 किलोग्राम हेरोइन और 5 करोड़ इंजेक्शन व गोलियां बरामद हुईं। 2017 के चुनाव में कांग्रेस ने नशा खत्म करने का वादा किया लेकिन मुद्दा बना रहा। 2022 में आम आदमी पार्टी की सरकार ने नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का वादा किया और फरवरी 2025 में ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ अभियान शुरू किया। सरकार ने अपने शुरुआती चार वर्षों में 5,600 किलोग्राम से अधिक हेरोइन बरामद करने और 10,000 से अधिक तस्करों को गिरफ्तार करने के आंकड़े पेश किए हैं।

अब पंजाब में यह साफ़ हो गया है कि 2027 की सबसे बड़ी राजनीतिक लड़ाई इस बात पर होगी कि पंजाब को नशे से मुक्त करने का भरोसा कौन दिलाता है और कौन अपने दावों को जमीन पर साबित कर पाता है।

अंतिम फैसला नशे की उपलब्धता में कमी, बड़े तस्करी नेटवर्क पर कार्रवाई, युवाओं के पुनर्वास और कानून-व्यवस्था में वास्तविक सुधार से तय होगा।

भाजपा की दूसरी बड़ी चुनौती शिरोमणि अकाली दल के साथ संभावित गठबंधन है।

पंजाब विधानसभा चुनाव में शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और भाजपा के बीच छह साल पहले टूटी दोस्ती बहाल होनी करीब-करीब तय है। हालांकि पार्टी नेतृत्व को चुनाव पूर्व गठबंधन के कारण राज्य में उसकी ओर से छेड़े गए नशे के खिलाफ अभियान को धक्का लगने की आशंका है। दरअसल शिअद की अगुवाई वाली 2007 से 2017 तक की सरकार के दौरान ही राज्य में ड्रग माफिया के पैर पसारने के आरोप लगे थे।

दोनों दलों के फिर से साथ आने के कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण दोनों दलों की संयुक्त ताकत है। साथ रहते दोनों दलों को कम से कम 37% वोट मिले हैं। चूंकि इस बार की चुनावी जंग त्रिकोणात्मक होगी, ऐसे में चुनाव पूर्व गठबंधन सत्ता हासिल करने की स्थिति में होगी। इसके उलट अलग-अलग रहने का नुकसान दोनों दलों को हुआ है।

वैसे राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं होता है,  दावेदारी का दौर अभी चलता रहेगा। लेकिन इतना तो सच है कि इस बार पंजाब के चुनावी कंटेंट का कीवर्ड ' नशा मुक्त पंजाब ' ही रहने वाला है।

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