
मुझे आदमी का सड़क पार करना हमेशा अच्छा लगता है क्योंकि इस तरह एक उम्मीद - सी होती है कि दुनिया जो इस तरफ है शायद उससे कुछ बेहतर हो सड़क के उस तरफ। -केदारनाथ सिंह
Sunday, September 28, 2008
महरौली ब्लास्ट और मन

Friday, September 12, 2008
'दी लास्ट लियर' - शेक्सपीयर को श्रद्धांजलि

अमिताभ बच्चन, प्रीति जिंटा, अर्जुन रामपाल, दिव्या दत्ता, जिशु सेनगुप्ता अभिनीत इस फिल्म की कहानी हरीश उर्फ हैरी (अमिताभ बच्चन) के इर्द-गिर्द घूमती है। 65 साल का यह शख्स घर बैठे, वोदका और रिटायरमेंट का आनंद ले रहा है। दुनिया की चिंता किए बगैर वह शेक्सपीयर की रट लगाते रहता है। शेक्सपीयर को लेकर वह जुनूनी है।
हैरी अपनी साथी वंदना (शेफाली शाह) के साथ कोलकाता के एक इलाके में सामाजिक बंदिशों की परवाह किए बिना रहते हैं। वे दुनिया के लिए अदृश्य हैं और आसपास की घटनाओं से बेखबर भी।
निर्माता अरिंदम चौधरी की इस फिल्म का मुख्य चरित्र हैरी अभिनय के लिए जीता है, उसे रंगमंच से प्यार है। वह शेक्सपीयर की पूजा करता है और सिनेमा को बिल्कुल नापसंद करता है।
एक दिन एक युवा, शांत और अड़ियल निर्देशक सिद्धार्थ (अर्जुन रामपाल) का उनकी जिंदगी में प्रवेश होता है। हैरी को पहली ही मुलाकात में वह समझदार लगता है, क्योंकि उसे हैरी के घर के बाहर टंगी वह घंटी दिख जाती है, जो आज तक किसी और को नहीं दिखी थी।
एक समझदार साथी पाकर हैरी को बेहद खुशी होती है जिसके साथ वह वार्तालाप कर सकता है। कॉफी, वोदका के बीच उनकी बातचीत और घनिष्ठता बढ़ती जाती है। हैरी से मिलने के बाद लोग पहले जैसे नहीं रह जाते। इस दौरान बहुत कुछ घटता है और कितने ही लोगों के जीवन में बदलाव आ जाता है।
Sunday, September 07, 2008
कोसी की सात धाराओं को नहीं बांधा जा सकता : अनुपम मिश्र
यही है बैराजजल संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाले प्रख्यात पर्यावरणविद् अनुपम मिश्र का कहना है कि कोसी पर बैराज और तटबंध बनाकर उसे बांधने की कोशिश आगे और तबाही का सबब बन सकती है।
मिश्र ने बताया कि गाद से भरी कोसी पर अगर तटबंध बना दिए जाएं तो यह एक बार फिर पूर्व-पश्चिम की ओर अपनी दिशा बदलेगी और क्षेत्र की भौगोलिक बनावट के विपरीत बहाव के साथ दोबारा तबाही का कारण बनेगी।
जल व्यवस्था और पारंपरिक जल संरक्षण पर अनेक किताबें लिखने वाले मिश्र ने कहा, "कोसी की सात धाराओं को नहीं बांधा जा सकता। मैदानी इलाकों में नदी में गाद जमा होने के कारण पानी दिशा बदल रहा है। यह नदी 20 हजार साल पुरानी है। पिछले 200 सालों में ये अपने असली रास्ते से करीब 120 किलोमीटर विचलित हुई है।"
उन्होंने बताया कि भारत-नेपाल सीमा पर बनाया गया बैराज इसके पानी को नियंत्रित नहीं कर पाया है जबकि इससे नदी की दिशा जरूर बदल गई है। मिश्र ने कहा कि बैराज और तटबंध उन नदियों में कारगर सिद्ध हो सकते हैं जिनमें गाद कम होता है और जिनके बहाव की गति धीमी है।
आगे पढ़ें बीबीसी की रिपोर्ट - पानी घटने के साथ महामारी की आशंका